गंगा दशहरा पर पांच अर्चकों के साथ मां गंगा की आरती करते पंडित रामानंद तिवारी।- सोशल मीडिया।
- फोटो : चौबेजोत के पास हुए हादसे के बाद जांच करती पुलिस।
विंध्याचल। गंगा दशहरा पर मंगलवार देर शाम विंध्याचल के पक्का घाट पर भक्ति, संस्कृति और आध्यात्मिक ऊर्जा का संगम देखने को मिला। मां गंगा के अवतरण दिवस पर भव्य महाआरती, वैदिक पूजन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने घाट को दिव्यता से सराबोर कर दिया। दीपों की रोशनी, वैदिक मंत्रोच्चार, डमरू निनाद और “हर-हर गंगे के जयघोष के बीच श्रद्धालु देर रात तक भक्ति में डूबे रहे।
विंध्य विकास परिषद के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता की। गंगा आरती प्रमुख रामानंद तिवारी ने मां गंगा की अष्टधातु प्रतिमा का शृंगार कराया। इसके बाद दूध, पुष्प, फल और मिष्ठान से विशेष अभिषेक एवं षोडशोपचार पूजन संपन्न हुआ।
श्रद्धा स्वरूप मां गंगा को पियरी साड़ी अर्पित की गई। मुख्य अतिथि जिलाधिकारी पवन कुमार गंगवार ने संकल्प लेकर मां गंगा का वैदिक पूजन किया, जिसके बाद महाआरती प्रारंभ हुई। महाआरती के दौरान पांच वैदिक ब्राह्मणों ने दीप स्तंभों के साथ सामूहिक आरती उतारी, जबकि 101 कन्याओं ने आरती की थालियों के साथ मातृशक्ति का आह्वान किया। मां विंध्यवासिनी श्रवण वेद पाठशाला के प्रधानाचार्य आचार्य अगस्त द्विवेदी के सानिध्य में वैदिक बटुकों ने चारों वेदों और गंगा लहरी का पाठ किया। जिलाधिकारी पवन कुमार गंगवार ने कहा कि मां गंगा भारतीय संस्कृति की आत्मा हैं और सभी को गंगा की स्वच्छता के प्रति जागरूक रहना चाहिए।
वहीं विशिष्ट अतिथि नगर मजिस्ट्रेट एवं सचिव अविनाश कुमार ने कहा कि गंगा दशहरा केवल धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि प्रकृति और संस्कृति के प्रति आस्था व्यक्त करने का अवसर भी है। सांस्कृतिक कार्यक्रमों में शास्त्रीय संगीत से लेकर भजन और कत्थक की मनमोहक प्रस्तुतियां दी गईं।