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Mirzapur News: डेढ़ वर्ष पहले पत्नी की जहर खाने से हुई थी मौत, अवसाद में पति ने भी जहर खाकर दी जान

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देहात कोतवाली के जिउती भटेवरा में जहर खाने से मृत रामबली। स्रोत-परिवार
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मिर्जापुर। देहात कोतवाली क्षेत्र के जिउती भटेवरा गांव में डेढ़ वर्ष पहले विवाद के बाद पत्नी सावित्री की जहर खाने से मौत हो गई थी। बेटी इलाज के दौरान बच गई थी। सोमवार को पति रामबली ने भी जहर खाकर जान दे दी। डेढ़ वर्ष पहले विवाद में पत्नी ने जहर खाकर जान देेने की बात कही थी तो रामबली ने ही तुरंता नामक जहर लाकर दे दिया था। जिसे पत्नी ने अपनी पुत्री के साथ खाया था। पत्नी को याद करते हुए सोमवार को रामबली ने भी तुरंता खाकर जान दे दिया। पट्टीदार खजांती और भज्जन ने बताया कि रामबली (50) और उनकी पत्नी सावित्री को पांच पुत्री और एक पुत्र है। रामबली मजदूरी कर परिवार का भरण पोषण करते थे। डेढ़ वर्ष पहले पत्नी सावित्री से काम-धंधा न करने को लेकर विवाद हुआ था। पत्नी ने कहा कि काम धंधा नहीं करते हैंं। हम जहर खाकर मर जाएंगे। इसके बाद रामबली ने गुस्से में उसे जहर लाकर दे दिया, बोला कि लो खा लो। इस पर पत्नी ने खुद जहर खाकर बेटी पूनम को भी जहर दे दिया था। पत्नी की तो अस्पताल ले जाने पर मौत हो गई। पूनम तीन माह इलाज के बाद सही हुई। इसके बाद किसी तरह से जीवन चल रहा था। पत्नी की मौत के बाद रामबली की मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी। सोमवार को मानसिक रूप से अस्वस्थ रामबली ने भी जहर खा लिया। हालत बिगड़ने पर अस्पताल उसे ले जाया गया, वहांं उनकी मौत हो गई थी। अपराध निरीक्षक कोतवाली देहात मनोज कुमार ने बताया कि डेढ़ वर्ष पहले पत्नी की जहर खाने से मौत हो गई थी। पति रामबली ने भी सोमवार को जहर खाकर जान दे दी। वह मानसिक रूप से अस्वस्थ था।
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पति-पत्नी की ठीक नहीं थी मानसिक स्थिति, इलाज की थी जरूरत-मिर्जापुर। मंडलीय अस्पताल के नैदानिक मनोवैज्ञानिक डा. राहुल सिंह ने बताया कि कमाने को लेकर पति-पत्नी में विवाद हुआ था। इस विवाद में अगर पत्नी जहर खाकर जान देने की बात कह रही तो उसकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं है। वहींजहर देने वाले पति की भी मानसिक स्थिति ठीक नहीं है। पति की मानसिक स्थिति ठीक रहती तो वह पत्नी को ऐसा करने से रोकने के लिए समझाता न की जहर देता। पति की पहले से मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी। पत्नी की मौत के बाद वह और अवसाद में चला गया। उस समय भी परिवार का कोई सदस्य दोनों को समझाता इलाज कराता तो बात बन सकती थी। अवसाद में चल रहे पति का इलाज कराया जाता तो वह भी ठीक हो सकता था। समाज में लोग मानसिक रोग के इलाज के बारे में कम जागरूक है। कहीं भी इस प्रकार स्थिति उत्पन्न हो तो मनोचिकित्सक की सलाह लें।
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