शृंगार के बाद मां विंध्यवासिनी का भव्य स्वरूप।
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विंध्याचल। सावन पूर्णिमा पर आदिशक्ति के दरबार में शनिवार को भोर से देर रात तक श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी रही। मां विंध्यवासिनी के दरबार में भक्तों ने शीश नवाकर सुख-समृद्धि की कामना की। भोर में मंगला आरती के बाद मंदिर के कपाट आमजन के दर्शन के लिए खोल दिए गए। देर रात तक दर्शन-पूजन का सिलसिला चलता रहा। गंगा घाटों पर भी श्रद्धालुओं की भीड़ रही।
गुड़हल, गुलाब एवं कमल आदि के पुष्पों व रत्नजड़ित आभूषणों से माता का शृंगार किया गया। मां के अद्भुत स्वरूप का दर्शन कर श्रद्धालु भाव विभोर हो गए। घंटा-घड़ियाल, शंख, नगाड़ा व मां विंध्यवासिनी के जयकारे से विंध्यधाम गूंजायमान रहा।
मां विंध्यवासिनी के दर्शन के बाद भक्त अष्टभुजा पहाड़ी पर विराजमान मां काली व मां अष्टभुजा देवी के दरबार में पहुंचकर दर्शन-पूजन किए।
मां शीतला के चरणों में 20 हजार भक्तों ने नवाए शीश : श्रावण पूर्णिमा पर हलिया में शनिवार को लगभग 20 हजार देवी भक्तों ने गड़बड़ाधाम पहुंच कर मां शीतला का दर्शन-पूजन किए।
दर्शन से पहले अधिकांश श्रद्धालुओं ने सेवटी नदी डुबकी लगाई। स्नान-ध्यान के बाद माला-फूल, नारियल, चुनरी व प्रसाद लेकर भक्त कतारबद्ध हो गए। मंगला आरती के बाद जैसे ही मंदिर का कपाट खुला देवी भक्त मां शीतला की एक झलक पाने के लिए बेताब रहे। मंदिर के पुजारी मंगलधारी मिश्रा ने बताया मंगला आरती के बाद रिमझिम बारिश के बीच लगभग 20 हजार से अधिक भक्तों ने मां शीतला का दर्शन-पूजन किया।