मिर्जापुर। गरीब बच्चों के लिए सरकार ने आरटीई जैसा कानून बनाया है। साथ ही गरीब बच्चों का निजी विद्यालयों में प्रवेश को लेकर कानून भी बनाया लेकिन विभाग और शासन प्रशासन खुद ही इसका मखौल उड़ा रहा है।
एक ओर जहां लाकडाउन के चलते पूरा देश बंधक था तो बेसिक शिक्षा विभाग ने निर्धारित समय पर निजी विद्यालय में प्रवेश के लिए सोमवार को लाटरी निकाल दी। इसमें 11 सौ 92 को सफल घोषित किया गया। हालांकि आवेदन के लिए दो मार्च से दो जून तक की समय सीमा तय की गई थी और आठ जून को लाटरी निकलनी थी। पूरे देश में 25 मार्च से ही लाकडाउन लगा दिया गया और यह 31 मई तक रही। इसके बाद भी कुछ दुकानें बंद रहीं और कुछ खुली रही। लेकिन विभाग का मानना था कि आवेदकों ने आवेदन कर दिया होगा। विभाग के अधिकारियों का स्वयं कहना था कि इस समय पूरी प्रक्रिया स्थगित है। उसके बाद किन परिस्थितियों में यह लाटरी निकाली गई। यह जांच का विषय है। जो लोग इसमें आवेदन करने वाले थे। उनका आरोप है कि उनका अवसर विभाग ने छीनकर अपने चहेतों को दे दिया। यह बड़ी खेदजनक स्थिति है कि एक ओर जहां पूरा देश कोरोना से बचाव में था। विभाग ने ऐसा काम कर दिया। आवेदकों ने जांच की मांग की है।
इस संबंध में जब बीएसए वीरेंद्र कुमार सिंह से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि लाकडाउन होने से क्या होता है। लोगों ने अपने घरों से फोन से आवेदन किया था। अब उनको कौन बताए कि इस योजना का लाभ बीपीएल श्रेणी के लोग ही ले सकते हैं। जहां पर खाने के लाले पड़ रहे हों वहां पर एंड्रायड फोन और वह भी उसमें नेट भरवाने में पैसा कौन खर्च कर सकता है। इस सूचना से लोगों में काफी आक्रोश है। उनका कहना है कि यह सरकार की जनकल्याण की मूल भावना से खिलवाड़ है। उनकी मांग है कि इस लाटरी को निरस्त कर उनको आवेदन करने का अवसर दिया जाए।