मंडलीय अस्पताल में महिला और पुरुषों के लिए अलग-अलग बने बर्न वार्डों की हालत दयनीय है। इन वार्डों में न तो पंखा चल रहा है और न ही एसी काम कर रही है। ऐसे में वार्ड में भर्ती मरीजों को इस प्रचंड गर्मी में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई मरीज उपचार की बेहतर सुविधा न होने पर खुद को डिस्चार्ज करा कर अन्यत्र जा रहे हैं तो कुछ पैसे के अभाव में वहीं इलाज कराने के लिए विवश हैं।
मंडलीय अस्पताल मेडिकल कॉलेज के अधीन हो गया है, परंतु वहां उपचार की सुविधाएं नहीं बढ़ रही हैं। इस समय प्रचंड गर्मी पड़ रही है। इन दिनों आग लगने की घटनाएं भी अधिक हो रही हैं। आग लगने से फसल के साथ उसे बुुुझाने में कई लोग झुलस जा रहे हैं। मंडलीय अस्पताल में आग से झुलसे मरीजों के उपचार के लिए अलग वार्ड बना है। इसमें पुरुष और महिलाओं के लिए 12-12 बेड हैं। ठंड के मौसम में तो झुलसे मरीजों को थोड़ी राहत रहती है, परंतु गर्मी के मौसम में बिना एसी के उनका जीना दुश्वार हो जाता है। मंडलीय अस्पताल के बर्न वार्ड में एसी खराब रहने की समस्या पुरानी है। पहले विंडो एसी लगा था, तो उसके खराब होने के बाद अब स्प्लीट एसी लगाया गया है। एक वार्ड दो कमरों में संचालित होता है। सुविधा के नाम पर एक कमरे में दो पंखे और एक एसी है, परंतु यह सुविधा सिर्फ नाम के लिए है। पुरुष वार्ड के दो कमरों में इस समय सात मरीज भर्ती हैं। एक कमरे में पांच और दूसरे में दो मरीज हैं। जिस कमरे में दो मरीज हैं, उसमें सिर्फ एक पंखा चल रहा है। एसी लगा है, वो चल तो रहा है परंतु कुलिंग नहीं हो रही है। एसी में कुलिंग करने के लिए लगा गैस किट खराब है, परंतु उसे बदलने की जहमत नहीं उठाई जा रही है। दूसरे कमरे का भी एसी सिर्फ चल रहा है, परंतु ठंडा नहीं कर रहा है। इस कारण मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। एसआईसी डॉ. आलोक का कहना है कि एसी का गैस कम है, उसे भरवाया जाएगा, परंतु ऐसा भी नहीं है कि वह कुलिंग नहीं कर रहा है। खराब पंखे की मरम्मत के लिए बोला गया है। जल्द ही उसकी मरम्मत हो जाएगी। आग से झुलसे मरीजों के लिए पर्याप्त दवाएं उपलब्ध हैं।