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एक माह बाद भी न शव मिला, न मौत के कारण का पता चला

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जमालपुर। मुंबई से लौटते समय जमालपुर थाना क्षेत्र के चैनपुरा गांव निवासी प्रवासी की एक माह पूर्व मध्य प्रदेश के सागर जिले में मौत हो गई थी। परिजन गए तो उन्हें शव न देकर डेथ सर्टिफिकेट दे दिया गया। डेथ सर्टिफिकेट में मौत का कारण कोरोना नहीं दर्शाया गया है। इसके बाद भी शव न दिए जाने से मृतक की पत्नी एक माह से अधिकारियों के कार्यालय का चक्कर लगाकर भटक रही है। मामले में सोमवार को थानाध्यक्ष अश्वनी त्रिपाठी ने मृतक की पत्नी का बयान दर्ज किया।
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जमालपुर के चैनपुरा गांव निवासी शिवलोचन 25 साल से मुंबई के मलाड इलाके में रहकर सिलाई का कार्य करके परिवार का पालन पोषण करता था। लॉकडाउन के दौरान रोजगार बंद होने पर वह चंदौली जनपद निवासी अपने 15 दोस्तों के साथ 90 हजार रुपये में निजी बस कर 24 मई की रात 11 बजे मलाड से घर के लिए निकला। 25 मई को मध्यप्रदेश के सागर जनपद पहुंचने पर अचानक उसकी तबीयत खराब हो गई। उसके साथियों ने सागर के जिला अस्पताल में रात 10 बजे भर्ती करा दिया। इलाज के दौरान अस्पताल में 26 मई की सुबह उसकी मौत हो गई। मृतक के साथियों ने फोन से परिवार वालों को जानकारी दी। मृतक के तीन परिजन मध्यप्रदेश के सागर जनपद को रवाना हो गए थे। मृतक के भाई बेचन ने बताया कि चिकित्सकों ने उसके भाई की मौत के बाद उसका स्वाब लेकर जांच के लिए भेजा। 27 मई को चिकित्सकों ने शव न देकर डेथ सर्टिफिकेट थमा दिया। मृतक की पत्नी चंचला देवी ने बताया कि डेथ सर्टिफिकेट पर कोरोना के कारण मौत का जिक्र नहीं है। इसके बाद भी मध्य प्रदेश प्रशासन ने उसके पति के शव को नहीं दिया। शव के लिए वह एक माह से अधिकारियों का चक्कर काट रही है, पर न तो शव मिला न ही मौत के कारण का पता चला। सोमवार को मृतक की पत्नी जमालपुर थाने पर पहुंची। उन्होंने कहा कि अगर कोरोना से मौत के कारण शव को नहीं दिया गया तो डेथ सर्टिफिकेट पर उसका जिक्र क्यों नहीं किया गया। थानाध्यक्ष अश्वनी त्रिपाठी ने बताया कि महिला का बयान लिया गया है। मध्य प्रदेश प्रशासन को इससे अवगत कराकर मामले की जांच की जा रही है।
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