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श्री हरि प्रबोधनी एकादशी: घाटों पर उमड़ा आस्था का सैलाब

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बाबाघाट में देवोत्थान एकादशी के पर्व पर स्नान करने के बाद पूजा करते लोग। - फोटो : MIRZAPUR
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मिर्जापुर। श्री हरि प्रबोधिनी एकादशी पर शुक्रवार को नगर के सभी गंगा घाटों पर आस्था का सैलाब उमड़ा। अलसुबह से ही विभिन्न घाटों पर पहुंचे श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाकर पुण्य अर्जित किया। इस दिन तुलसी-शालिग्राम की शादी भी कराई गई। गंगा घाटों पर पहुंचे नर व नारियों ने घाट पर गन्ना रखकर भगवान विष्णु का पूजा- अर्चनकर परिवार के सुख समृद्धि की कामना की।
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गंगा घाटों पर पहुंचे हजारों की संख्या में पहुंचे आस्थावानों ने गंगा में स्नान, ध्यान कर पुण्य का लाभ कमाया। गंगा स्नान करने के बाद श्रद्धालुओं ने तट पर ही स्थित देवालयों में पहुंचकर विराजमान विभिन्न देवी- देवताओं के दर्शन और पूजा कर मंगलकामना की। नगर के बरियाघाट, कचहरीघाट, सुंदर घाट, संकठा घाट, बाबा घाट, नारघाट, पक्का घाट सहित अन्य घाटों पर भोर से शुरू हुआ स्नान व दान का सिलसिला दोपहर बाद तक चलता रहा। नगर के बरिया घाट व पक्का घाट के आसपास मेले जैसा नजारा रहा। गंगा घाट की ओर जाने वाले मार्ग पर दोनों पटरियों पर दुकानें सजी रहीं। गंगा घाटों पर किसी प्रकार की कोई अप्रिय घटना न घटे इसके लिए सुरक्षा बलों के साथ ही महिला पुलिस कर्मियों को लगाया गया था। गंगा में स्नान करने के बाद महिलाओं ने तट पर ही गन्ना, माला-फूल व प्रसाद चढ़ाकर भगवान श्री हरि का विधिवत पूजन अर्चनकर सुख, समृद्धि की कामना की।
हरि प्रबोधिनी पर बरिया घाट पर शुक्रवार को मेला जैसा नजारा रहा। घाट की ओर जाने वाले मार्ग पर सड़क की दोनों पटरियों पर शृंगार व बच्चों के खिलौनों की दुकानें सजी रहीं। जहां महिलाओं और बच्चों ने दोपहर बाद तक जमकर अपने पसंदीदा सामान खरीदे। शाम को तुलसी-सालिग्राम विवाह को देखते हुए महिलाओं और किशोरियों ने शृंगार के सामान खरीदे। इसी तरह बच्चों ने भी दुकानों पर सजे अपने मनपंसद खिलौनों की खरीददारी की।
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श्री हरि प्रबोधिनी एकादशी पर नगर समेत ग्राम्यांचलों में शुक्रवार को तुलसी-शालिग्राम का हर्षोल्लास के साथ विवाह कराया गया। कई लोगों ने अपने घर आंगन में बाकायदा मंडप तैयार कर तुलसी का सोलह शृंगार किया। इस अवसर पर पूरे दिन व्रत रहकर कई महिलाओं ने कन्यादान की परंपरा निभाई।
बतातें चलें कि ज्यादातर किशोरियों और महिलाओं की ओर से कार्तिक मास में प्रत्येक दिन व रविवार को व्रत रहकर तुलसी में जल छोड़कर पूजा व अर्चन किया गया। विष्णु पुराण के अनुसार भगवान विष्णु ने शंखासुर नामक भयंकर राक्षस का वध किया था। फिर आषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी को क्षीर सागर में शेषनाग की शैय्या पर भगवान विष्णु ने शयन किया। चार महीने की योग निद्रा त्यागने के बाद भगवान विष्णु जागे। इसी के साथ ही देवउठनी एकादशी के दिन चतुर्मास का अंत हो जाता है। जागने के बाद सबसे पहले उन्हें तुलसी अर्पित गई।
श्री हरि प्रबोधिनी व देवोत्थान एकादशी पर शुक्रवार को विंध्याचल स्थित मां विंध्यवासिनी का दरबार सजा रहा। मां विंध्यवासिनी के भव्य स्वरूप की एक झलक पाने के लिए सुबह से ही भक्तों का तांता लगा रहा। भोर में मंगला आरती के बाद मंदिर का कपाट खुलते ही पहले से ही कतारबद्ध श्रद्धालु गर्भगृह की ओर टूट पड़े।
हांथों में नारियल, चुनरी, गुड़हल का माला व प्रसाद लिए मंदिर पहुंचे भक्त मां के भव्य स्वरूप का दर्शन और पूजन कर निहाल हो रहे थे। किसी ने गर्भगृह में तो किसी ने झांकी से ही माता की एक झलक प्राप्त कर पुण्य के भागी बने। मां विंध्यवासिनी के दर्शन और पूजन बाद अधिकांश श्रद्धालु मंदिर परिसर में ही स्थित अन्य मंदिरों में विराजमान अन्य देवी और देवताओं के दर्शन और पूजन किए। मंदिर की छत पर पहुंचे भक्तों ने परिक्रमा किया। आस्था धाम में उमड़े भक्तों की भीड़ को देखते हुए मंदिर व गंगा घाटों के आसपास सुरक्षाकर्मियों का कड़ा पहरा रहा।
विंध्य क्षेत्र के विभिन्न गंगा घाटों पर शुक्रवार को स्नान करने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। विंध्याचल के दीवान घाट, पक्का घाट, कच्चा घाट, इमली घाट सहित अन्य गंगाघाटों पर शुक्रवार की भोर से स्नान के लिए आने वालों का क्रम जारी रहा। स्नान व ध्यान का सिलसिला दोपहर बाद तक जारी रहा। कई घाटों पर स्नान करने आई महिलाओं और किशोरयों को स्नान बाद मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा था। वस्त्र बदलने का समुचित इंतजाम न किए जाने से लोग खुले में ही वस्त्र बदलने को मजबूर दिखे। गंगा घाटों के आसपास व्याप्त गंदगी के चलते श्रद्धालु परेशान रहे।
श्री हरि प्रबोधिनी एकादशी पर शुक्रवार को बाजारों गन्ना, सिंघाड़ा व कंदमूल की जमकर बिक्री हुई। नगर के वासलीगंज, घंटाघर, मुकेरी बाजार, रमईपट्टी, सिविल लाइन, महुवरिया, तेलिया गंज समेत अन्य बाजारों में सड़क की पटरियों पर इससे संबंधित अस्थाई दुकाने सजी रहीं। नगर में स्थानीय गन्ने के बजाए प्रयागराज व पड़ोसी जनपदों से आए गन्ने ज्यादा पसंद किए गए। इनके दामों में भले ही सुबह उछाल रहा पर शाम ढलते ही 70 से 80 रुपये प्रति जोड़ा बिकने वाला गन्ना 40 से 50 रुपये प्रति जोड़ा बेचे गए।
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