फाल्गुन कृष्ण एकादशी पर विंध्यधाम में दर्शन-पूजन करने के लिए भक्ताें का तांता लगा रहा। नर-नारियाें ने बड़े ही श्रद्धाभाव से विंध्य दरबार में मत्था टेक सुख-समृद्धि की कामना की।
जगत जननी का फूलों से किया गया भव्य श्रृंगार दर्शन कर श्रद्धालु निहाल हो उठे। घंटा-घड़ियाल, शंख और मां के जयकारे से पूरा धाम परिसर गुंजायमान हो रहा था।
रविवार को मंगला आरती के बाद से ही माता के भव्य स्वरूप का दर्शन-पूजन करने को भक्ताें का रेला उमड़ पड़ा। विंध्यधाम की गलियाें में कतार में खड़े दूर दराज से आये श्रद्धालु मां के दर्शन को लालायित दिखाई दिए।
गंगा में डुबकी लगाने के बाद भक्तजनों ने मंदिर पहुंच कर विधिवत दर्शन-पूजन किया। अधिकांश भक्तों ने गर्भगृह में पहुंच कर विधिवत दर्शन-पूजन कर मंगलकामना की। कुछ लोगों ने झांकी से भी दर्शन पूजन किया।
उधर मंदिर की छत पर पूजन-अनुष्ठान और मुंडन संस्कार के कार्यक्रम कराने वालों की भीड़ जुटी। मां विंध्यवासिनी का दर्शन-पूजन करने के बाद भक्तों ने विंध्यधाम में विराजमान अन्य सभी देवी-देवताओं के मंदिर पहुंच कर दर्शन-पूजन किया।
विंध्याचल की प्रमुख गलियों में कतार में खड़े भक्तजन मां का जयकारा लगाते धाम की तरफ बढ़े चले जा रहे थे। मां विंध्यवासिनी देवी का दर्शन-पूजन करने के बाद बड़ी संख्या में भक्ताें ने त्रिकोण परिक्रमा भी किया।
भक्तों ने विंध्य की गलियोें में भ्रमण कर अपने-अपने जरूरत की वस्तुआें की खूब खरीदारी की। मंदिर में उमड़ी आस्थावानाें की भीड़ को देखते हुए सुरक्षा-व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम रहे।