मिर्जापुर। मंडलीय चिकित्सालय व जिला महिला चिकित्सालय में सेंट्रल ऑक्सीजन सिस्टम है। इसके बावजूद चिकित्सक सिलेंडर पर ही भरोेसा करते हैं। मंडलीय चिकित्सालय के चिल्ड्रेन वार्ड, इमरजेंसी तथा महिला चिकित्सालय में पाइप लाइन है। चिकित्सक मानते हैं कि पाइप से मरीजों को ठीक से ऑक्सीजन नहीं मिल पाती है। कई बार नॉब खुली होने पर गैस रिसती रहती है, इससे काफी नुकसान होता है।
मंडलीय चिकित्सालय के चिल्ड्रेन वार्ड 30 बच्चों व इमरजेंसी में 12 मरीजों को भर्ती करने के लिए सुविधा है। इनमें मरीजों को पाइपलाइन से ऑक्सीजन देने की व्यवस्था की गई है। चिल्ड्रेन वार्ड को 14 सिलेंडर उपलब्ध रहते हैं। अगर एक दो मरीजों को ऑक्सीजन की जरूरत पड़ती है तो उन्हें पाइप की बजाय सिलेंडर से ऑक्सीजन दी जाती है। सर्जिकल, मेडिकल व महिला वार्ड में सिलेंडर के माध्यम से मरीजों को ऑक्सीजन दी जाती है। अस्पताल में 15 बड़े सिलेंडर तथा 25 से 30 छोटे सिलेंडर हैं। वहीं महिला चिकित्सालय के पूरे वार्ड व आईसीयू में भर्ती नवजातों को ऑक्सीजन देने के लिए पाइप लाइन दौड़ाई गई है लेकिन उन्हें पाइप लाइन से ऑक्सीजन नहीं दिया जाता है। जरूरत पड़ने पर मरीजों व बच्चों को सिलेंडर ऑक्सीजन दिया जाता है। स्वास्थ्य कर्मियों की माने तो पाइप लाइन से काफी ऑक्सीजन बर्बाद हो जाती है।
मंडलीय चिकित्सालय का एनआईसीयू वार्ड महिला चिकित्सालय में स्थानांतरित कर दिया गया है। मंडलीय अस्पताल में एक साल से अधिक उम्र के बच्चों को भर्ती किया जाता है। उससे छोटे बच्चों को महिला चिकित्सालय में भेजा जाता है। मंडलीय चिकित्सालय में दो बाल रोग विशेषज्ञ डा. आरके सिंह और राम फुलार तैनात है जबकि महिला अस्पताल में डा.एलएस सिंह, डा. आशुतोष शुक्ला व मृदुला जायसवाल की तैनाती है। एक माह के अंदर 40 से 50 आक्सीजन के सिलेंडर की खपत है जबकि जिला महिला चिकित्सालय में 60 सिलेंडरों की खपत होना बताया जा रहा है। बड़ा सिलेंडर भरवाने के लिए 300 रुपया तथा छोटा सिलेंडर को भरवाने में सौ रुपये खर्च आता है। वाराणसी के जगतपुर स्थित डीकाम रूप इंड्रस्ट्रीयल गैसेज लिमिटेड कंपनी सिलेंडरों की सप्लाई करती है।
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मंडलीय चिकित्सालय में मरीजों को ऑक्सीजन उपलब्ध कराने के लिए पर्याप्त मात्रा में सिलेंडर उपलब्ध है। ऑक्सीजन की कोई कमी नहीं है।
डा. ओपी शाही, प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक, मंडलीय चिकित्सालय