कोल्हड़ गांव में रविवार को एक महिला और उसके दो बच्चों की जलने से हुई मौत के मामले में सोमवार को नया मोड़ आ गया। महिला की 12 साल की बेटी ने मां, भाई और बहन को जलाकर मारने का आरोप लगाया है। उसकी बात सुने बगैर एसपी जाने लगे तो ग्रामीणों ने उनका और एएसपी नक्सल का घेराव किया। अधिकारियों ने देहात कोतवाली पुलिस को मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया है।
कोल्हड़ गांव के रामसहाय बिंद की पत्नी शीला तथा उसके दो बच्चे आजाद व तीन माह की बच्ची की रविवार को घर में आग लगने के कारण जलकर मौत हो गई थी। पुलिस व परिवार वालों का कहना था कि घर भीतर से बंद था और शार्ट सर्किट से कमरे में आग लगी है। ननिहाल में रहने वाली शीला की 12 वर्षीय बेटी रानी सोमवार को नानी के साथ पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंची। उसके साथ ननिहाल बड़ा सखौरा गांव के लोग भी थे। बालिका ने एसपी आशीष तिवारी को बताया कि उसकी मां व भाई बहन की मौत शार्ट सर्किट से आग लगने की वजह से नहीं हुई। एसपी उसकी बात अनसुनी कर जाने लगे तो गांव वालों ने एसपी तथा एडिशनल एसपी नक्सल आपरेशन हफीजुर्रहमान को घेर लिया। ग्रामीणों ने मुकदमा दर्ज करने और आरोपियों को जेल भेजने की मांग की। एसपी ने देहात कोतवाली पुलिस को मुकदमा दर्ज करने के लिए कहा, तब ग्रामीण शांत हुए।
रानी ने पुलिस को बताया कि रविवार को वह मां शीला, भाई आजाद व तीन माह की छोटी बहन के साथ कमरे में सोई थी। इसी दौरान उसके पिता रामसहाय, बड़े पापा शिव सहाय, बड़ी मां, चाचा तथा दादा आए और उसकी मां को मारने पीटने लगे। पापा ने मम्मी का गला दबाकर मार डाला। तीन माह की छोटी बहन को वहीं पटक दिया। भाई को भी मां के साथ चारपाई पर बांधकर गद्दे में लपेट दिया। इसके बाद मिट्टी का तेल छिड़ककर आग लगाने लगे। उसने बताया कि वे उसे भी मार डालना चाहते थे लेकिन वह वहां से भागकर नानी के घर पहुंच गई और आपबीती सुनाई।
रानी की नानी फुलदेई ने बताया कि बेटी को मार डालने की खबर सुनते ही वह परिवार वालों के साथ कोल्हड़ गांव में उसके घर गई थी। वहां ससुराल वाले दरवाजा नहीं खोल रहे थे। बड़ी मुश्किल के बाद दरवाजा खोलवाया तो देखा कि शीला राख में बदल चुकी थी। बेटा उसके पास अंतिम सांसें गिन रहा था, उठाते ही उसने भी दम तोड़ दिया।