संवाद न्यूज एजेंसी
मिर्जापुर। गया से महाबोधि एक्सप्रेस में सवार होकर नई दिल्ली जा रहे गया के यात्री किशोरी लाल की तबीयत रास्ते में खराब हो गई। जानकारी होने पर बेटे दीपक ने डेहरी आनसोन में ट्रेन पहुंचने से पहले रेलवे के हेल्पलाइन नंबर पर फोन कर जानकारी दी।
198 किमी चल कर ट्रेन सात स्टेशन पार करके चार घंटे बाद विंध्याचल पहुंच गई पर यात्री को इलाज नहीं मिल सका। विंध्याचल में जीआरपी ने यात्री का शव उतरवाकर परिजनों को सूचना दी। परिजनों ने रेलवे में उपचार की सुविधा न मिलने के कारण मौत होने का आरोप लगाया।
बिहार के नवादा निवासी दीपक ने बताया कि उनके का घर हरियाणा में भी है। वहां पर पिता कशोरी लाल (60) चावल मिल में काम करते हैं। एक महीने पहले छुट्टी में गांव घूमने आए थे। बृहस्पतिवार को उनको गया स्टेशन से महाबोधि एक्सप्रेस में बैठाए थे। डेहरी आनसोन के पहले पिता ने फोन कर बताया कि तबीयत खराब हो रही है। रेलवे के हेल्पलाइन नंबर 139 पर फोन किया। मनीष नाम के व्यक्ति ने फोन उठाया।
डेहरी आनसोन में बोगी के बाहर से ही पूछताछ कर वह गया। पिता के पास नहीं पहुंचा। पीडीडीयू जंक्शन में साथ सफर कर रहे वकील ने आरपीएफ से कहा कि मौत हो गई है शव को निकलवा दिजिए पर वहां सुनवाई नहीं हुई। इसके बाद रात को आठ बजकर 13 मिनट पर विंंध्याचल आरपीएफ ने फोन कर बताया कि पिता की मौत हो गई है। रेलवे से समय से उपचार मिलता तो पिता की जान बच सकती थी।
जीआरपी प्रभारी राघवेंद्र सिंह ने बताया कि यात्री के पुत्र ने डेहरी आनसोन में रेलवे के नंबर पर फोन कर सूचना दी थी पर उपचार नहीं मिला। विंध्याचल में शव को उतार कर परिजनों को सूचना दी गई। शुक्रवार को पोस्टमार्टम कराया गया।