मिर्जापुर। राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया रहाटकर ने बृहस्पतिवार को पुलिस लाइन सभागार में जनसुनवाई कीं।
एक महिला ने आरोप लगाया कि उसके पति उसकी पिटाई करते हैं, विरोध करने पर छोड़ने की धमकी देते हैं। ससुराल वाले भी साथ नहीं देते। जनसुनवाई में 71 मामले आए। ज्यादातर मामले घरेलू हिंसा और छेड़खानी के रहे।
दुष्कर्म के भी तीन मामले आए। इनमें से 36 मामले राष्ट्रीय अध्यक्ष ने सुने और 35 मामलों के लिए चुनार सीओ को मामले की जांच कर कार्रवाई करने के निर्देश दिए। दहेज प्रथा का विरोध करने की शपथ भी दिलाई।
इससे पहले उन्होंने मां विंध्यवासिनी का दर्शन किया। उसके बाद विकास भवन में आयोजित कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। बरकछा स्थित बीएचयू मेंं आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने के बाद वह जीडी बिनानी पीजी कॉलेज पहुंची। वहां पर उन्होंने एआई यशोदा कार्यशाला में प्रतिभाग किया। जिला पंचायत सभागार में अधिकारियों के साथ बैठक की।
इस दौरान मंडलायुक्त बालकृष्ण त्रिपाठी, आईजी आरपी सिंह, जिलाधिकारी पवन कुमार गंगवार, पुलिस अधीक्षक सोमेन बर्मा आदि थे। इस अवसर पर लगी प्रदर्शनी का उन्होंने निरीक्षण किया और पोषण आहार जागरूकता रेसीपी का अवलोकन किया।
यूनिसेफ की समन्वयक ने जानकारी दी। लघुचित्र का प्रदर्शन किया गया। इस दौरान पर पांच बच्चों का अन्नप्राशन कराया और गोद भराई की। उत्कृष्ट कार्य के लिए राष्ट्रीय अध्यक्ष ने पांच आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को प्रमाणपत्र का वितरण किया।
अपने लिए बनाए गए कानूनों के बारे में जाने महिलाएं : मिर्जापुर। पुलिस लाइन सभागार में बृहस्पतिवार को महिला आयोग की राष्ट्रीय अध्यक्ष विजया रहाटकर ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि महिलाओं को अपने लिए बनाए कानूनों के बारे में जानना चाहिए। जानकारी होने से ही जागरूकता बढ़ती है और वे अपने अधिकारों के प्रति सचेत हो सकती हैं।
राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि जनसुनवाई में महिलाओं से जुड़ी तमाम समस्याएं सामने आई। घरेलू हिंसा से लेकर दुष्कर्म व साइबर क्राइम जैसे मामले आए। उन सबकी सुनवाई की गई और उनको न्याय दिलाने का काम किया जाएगा। कहा कि जो समस्या पुलिस तक थी, उनका निस्तारण किया गया। इन सभी मामलों में ज्यादातर दहेज से जुड़ी समस्याएं थीं।
घरेलू हिंसा, छेड़खानी व अन्य मामला आया था। जिसका सुनवाई आज हुई है।
जब पत्रकारों ने पूछा कि मामलों की निगरानी नहीं की जाती है जिसके कारण मामला ठंडा पड़ जाता है। इस पर उन्होंने कहां कि ऐसा नहीं है। प्रत्येक 15 दिनों पर इसकी समीक्षा की जाती है। पुलिस भी अपनी कार्रवाई करती है।