मिर्जापुर। अहरौरा थाना क्षेत्र के गड़ई नदी के पास दस वर्ष पूर्व हत्या कर फेंके युवक के शव मामले में अदालत ने दोषसिद्ध पाते हुए हत्यारोपी पत्नी और उसके प्रेमी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही सात-सात हजार के अर्थदंड से दंडित किया। अर्थदंड न देने पर अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।
अहरौरा थाना क्षेत्र के हुसैनीपुर निवासी चौकीदार रमाशंकर पासवान 14 सितंबर 2010 की दोपहर जिगना से घर लौट रहा था। गांव के सिवान में गड़ई नदी स्थित रपटा पर भीड़ देखकर रुका तो वहां पर बोरे में सिर कटा एक शव मिला। शव को छिपाने के लिए नदी में फेंका गया था। सूचना पर पहुंची पुलिस शव को कब्जे में लेकर जांच पड़ताल में की। 16 सितंबर 2010 कलावती को सूचना मिली कि एक एक युवक का शव मिला है। कलावती ने बताया कि उसका पुत्र जयमूरत घाटमपुर में पत्नी मंजू के साथ किराए के मकान में रहता था। उसके हाथ पर खंजाटी-जयमूरत लिखा है। इस निशानदेही पर शव की पहचान जयमूरत के रूप में हुई। मामले में उसकी मां कलावती ने केस दर्ज कराया। शक के आधार पर जयमूरत की पत्नी मंजू देवी और राजकुमार बिंद के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की गई। पड़ताल में पता चला कि मंजू का राजकुमार बिंद संग संबंध है। दोनों ने मिलकर हत्या की है। पुलिस ने विवेचना कर आरोप पत्र दाखिल किया। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता (दांडिक) काशीनाथ दुबे ने गवाह परीक्षित कराकर पत्रावली न्यायालय में प्रस्तुत की। गवाहों के बयान और पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्य के आधार पर अपर सत्र न्यायाधीश जितेंद्र मिश्रा की अदालत ने दोष सिद्ध पाते हुए जयमूरत की पत्नी मंजू देवी और उसके प्रेमी राजकुमार बिंद को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही अलग-अलग धाराओं में सात हजार के अर्थदंड से भी दंडित किया। अर्थदंड न देने पर चार माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।