मिर्जापुर। चैत्र नवरात्र में विंध्याचल रोडवेज परिसर में चल रहे विंध्य महोत्सव में दूसरे दिन शुक्रवार की रात अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में ख्यातिलब्ध कवियों ने एक से बढ़कर एक रचनाएं पेश कीं। हास्य कवि विकास बौखल की प्रस्तुति किसी खंजर से ना तलवार से जोड़ा जाए, चलो सारी दुनिया को प्यार से जोड़ा जाए ने सबसे अधिक तालियां बटोरीं।
कवि सम्मेलन के मुख्य अतिथि अपना दल एस की छानबे से विधायक रिंकी कोल, जिलाधिकारी पवन कुमार गंगवार, अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व अजय कुमार सिंह ने दीप जलाकर व मां विंध्यवासिनी के पूजन से कार्यक्रम का शुभारंभ किया। लखनऊ से आई कवयित्री शिखा श्रीवास्तव ने वाणी वंदना कर काव्य निशा की शुरुआत की।
उन्नाव से आए स्वयं श्रीवास्तव ने सुनाया, दुनिया समझ रही है कि चमक गया हूं मैं, पर दिल ही जानता है कितना थक गया हूं मैं। लल्लू तिवारी ने सुनाया, आदमी अब नहीं यंत्र है, सारा जीवन ही जइसे की षड़यंत्र है। शिखा श्रीवास्तव ने सुनाया, मैं नारी चाहत का एक समंदर रखती हूं, संग हौसलों के मैं चाहत का पर रखती हूं। घर से लेकर दफ्तर तक की जिम्मेदारी है, कदमों में धरती आंखों में अंबर रखती हूं।
शिवकुमार व्यास ने सुनाया, वीर बलिदानियों की जुबानी लिखो, विकसित भारत की अनुपम कहानी लिखो, जब लिखो तब किसी पर मुरव्वत नहीं, दूध को दूध पानी को पानी लिखो। बाराबंकी से आये हास्य कवि प्रमोद पंकज ने सुनाया, शब्द गढ़ते तो तुलसी के पुजारी बन गए होते, सुर के सिंधु के तट के प्रभारी बन गए होते। बाराबंकी से ही आए शिवेश राजा ने सुनाया, कुहासा झूठ का जब सत्य को ढंकने लगेगा, जब मूल्य मानव जाति का घटने लगेगा।
अंत में अपर जिलाधिकारी अजय कुमार सिंह, उप जिलाधिकारी संजीव कुमार यादव व जिला सूचना अधिकारी ओम प्रकाश उपाध्याय ने कवियों को शाल चुनरी, स्मृति चिह्न एवं प्रमाण पत्र भेंट कर सम्मानित किया। इस मौके पर एसपी अपर्णा कौशिक रजत व अन्य उपस्थित रहे।