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अमावस के काली रातों में जब दिल का दरवाजा खुलता है......

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बीएचयू के बरकछा स्थित राजीव गांधी दक्षिणी परिसर में युवा महोत्सव में सबोंधित करते कुमार विश्वास - फोटो : MIRZAPUR
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मिर्जापुर। जख्म इतने मिले फिर सिले ही नहीं, दीप ऐसे बुझे की जले ही नहीं नहीं, व्यर्थ किस्मत पर रोने से क्या फायदा, समझ लेना की हम तुम मिले ही नहीं। हवा का काम है चलना, दिए का काम है जलना, वो अपना काम करती है मैं अपना काम करता हूँ। किसी के दिल की मायूसी जहां से होके गुजरी है। तुम्हारी और मेरी रात में बस फर्क इतना है, तुम्हारी सो के गुजरी है, हमारी रो के गुजरी है। ये कविताएं प्रसिद्ध कवि डा. कुमार विश्वास ने गुरुवार को बीएचयू के बरकछा स्थित राजीव गांधी दक्षिणी परिसर में आयोजित अंतर संकाय युवा महोत्सव के दौरान कही। इससे पहले मंच पर मुख्य अतिथि डा. कुमार विश्वास महामना मदन मोहन मालवीय की प्रतिमा पर मार्ल्यापण और दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
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डा. कुमार विश्वास ने अपनी प्रसिद्ध कविता कोई दीवाना कहता है, कोई पागल समझता है, पर धरती की बेचैनी को बस बादल समझता है गाकर युवाओं को झुमने पर मजबूर कर दिया। लोग कोई दीवाना कहता है पूरी कविता पढ़ने की फरमाई करने लगे। इस बीच कुमार ने छात्रों की फरमाईश पर गया पगली लड़की के बिन जीना गद्दारी लगता है,
उस पगली लड़की के बिन मरना भी भारी लगता है। बताया कि पहली बार उन्होंन इक पगली लड़की के बिन बीएचयू आईआईटी में गाया था। जिसके बाद यह कविता को प्रसिद्धी मिली। इस कविता पर युवाओं का जोश और बढ़ गया। दर्शक दीर्घा में रोशनी की कमी होने पर कटाक्ष किया कि देश की तरह आप भी अंधेरे में है। इसके बाद जख्म भर जाएंगे तो मिलो तो सही, मै भी सपने में आने लगूं। सिर्फ सांसो की गुफ्तगू है। चांदनी नूर बरसा रही है। है नमन उनको जो देश को अमरत्व देकर गए गायक शहीदों को याद किया। लगभग दो घंटे के उद्दबोधन में डा. कुमार विश्वास ने युवाओं को इश्क की कविताओं से झुमाया तो देशभक्ति कविताओं से देशभक्ति का पाठ भी पढ़ाया।
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कविता पाठ करते समय कुमार विश्वास ने एक ऊनी टीशर्ट पहना था। ठंड लगने पर लोगों ने कुमार विश्वास जैकेट पहनने को कहा तो कुमार ने कहाकि सियाचिन के बार्डर पर भी मिर्जापुर का कोई बेटा ड्यूटी दे रहा होगा। वो सैनिक कड़ी ठंड में सजग ड्यूटी कर रहा है तभी इस साउथ कैंपस में हम आसानी से कार्यक्रम कर रहे है। पुलिस के कार्य को भी सराहा। कहाकि पुलिस के लोग अपने परिवार के साथ त्योहार नहीं मना पाते और हम विरोध में उन पर पत्थर बरसाते है।
डा. कुमार विश्वास ने दक्षिणी परिसर में कार्यक्रम में मौजूद लोगों से भोजपुरी में संवाद करते हुए कहाकि अउर कइन बा। भोजपुरी संवाद पर लोगों ने कहाकि की सब ठीक बा। कुमार ने कहाकि कहाकि मिर्जापुर में लोगों पर कालीन भैया का पानी चढ़ गया है।
कार्यक्रम का शुभारंभ होने पर आचार्य प्रभारी प्रो. रमादेवी निम्मानापल्ली ने स्वागत उद्बोधन करते हुए कोई दिवाना कहता है, कोई पागल समझता है गाकर डा. कुमार विश्वास का स्वागत किया। अध्यक्षयीय उद्बोधन रेक्टर प्रो. वीके शुक्ला ने किया। मंच पर डा. आरएस मिश्रा, लक्ष्मण प्रसाद गुप्ता मौजूद रहे। इस अवसर पर कौस्तुव चटर्जी, नवीन कुमार, कृष्ण कांत आदि रहे।
कुमार विश्वास ने पहली बार मिर्जापुर में पहली बार कविता पाठ करते हुए मां विंध्यवासिनी को नमन किया। कहाकि ये अगस्त का तब है जो पर्वत झूका हुआ है। इस पर्वत से होकर हमारे आदर्श भगवान श्रीराम गुजरे है। ये आचार्य रामचंद्र शुक्ल कर धरती है।
डा. कुमार विश्वास ने कहाकि पहाड़ पर बसा यह महामना का यह कैंपस साधना का केंद्र है। 31 वर्ष से कविता पाठ कर रहा हूं। यहां पर पहली बार आया । भविष्य में पता नहीं कब आउंगा। इसलिए ध्यान से सुने।
डा. कुमार विश्वास ने महाराष्ट्र चुुनाव के सियासी घटनाक्रम पर चुटकी ली। कहाकि अजित पवार ने जो किया, शरद पवार ने बताया दिया कि हर चाचा शिवपाल नहीं होता। इस पर लोगों ने तालियां बजाकर जमकर ठहाके लगाए।
डा. कुमार विश्वास ने अपनी कविताओं के बहाने राहुल गांधी, नरेंद्र मोदी और अरविंद केजरीवाल पर कटाक्ष किया। राहुल गांधी के लिए कहाकि इस अधूरी कहानी का क्या फायदा। नरेंद्र मोदी के लिए कहा जिसमें धुलकर नजर भी न पावन बने, आंख में ऐसे पानी का क्या फायदा। फिर अरविंद केजरीवाली के लिए कहाकि बिन कथानक कहानी का क्या फायदा। कुमार विश्वास ने अरविंद केजरीवाल का नाम नहीं लिया, अपना वाला बोलकर कटाक्ष किया।

बीएचयू के बरकछा स्थित राजीव गांधी दक्षिणी परिसर में युवा महोत्सव में सबोंधित करते कुमार विश्वास- फोटो : MIRZAPUR

बीएचयू के बरकछा स्थित राजीव गांधी दक्षिणी परिसर में युवा महोत्सव में सबोंधित करते कुमार विश्वास- फोटो : MIRZAPUR

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