शुक्रवार की रात से हो रही झमाझम बारिश से जहां एक ओर किसानों के चेहरे खुशी से खिल उठे। वहीं दूसरी ओर बारिश होने से खेत जलमग्न हो गए और नदी, नहर, बंधी और तालाब लबालब भर गए।
विंध्य की घाटी में लगातार पड़ रही फुहार जिले के पर्यटन स्थलों पर सैैलानियों का जमावड़ा होने लगा है, वहीं किसान खेती-किसानी के कार्य में तेजी से जुट गए हैं। जिन किसानों ने पहले से धान की नर्सरी डाल रखी थी, उनके लिए यह बारिश वरदान साबित हो रही है।
विगत कई दिनों से मौसम का मिजाज बदलने से जहां एक ओर लोगों को उमस भरी गर्मी से राहत मिली, वहीं शनिवार को दिन भर पड़ रही रिमझिम फुहार से मौसम खुशगवार हो गया।
लगातार हो रही बारिश से नगर के कई सड़कों, गलियों, कालोनियों में जगह-जगह जलभराव की स्थिति पैदा हो गई, जिससे लोगों के आवागमन में असुविधा का सामना करना पड़ा।
कई स्थानों पर नालियों के जाम होने से मार्ग पर गंदा पानी फैला रहा, जिससे लोगों को आने-जाने में परेशानी हो रही थी।
शनिवार को पूरे दिन सूर्यदेव के दर्शन तक लोगों को नसीब नहीं हो पाए, वहीं आसमान में उमड़ते-घुमड़ते बादलों से वातावरण में हल्का अंधेरा जैैसा माहौल बना रहा।
बारिश होने से सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहा, वहीं दुकानों पर ग्राहकों के नदारद होने से दुकानदार भी मायूस दिखाई दिए। लगातार हो रही बारिश से किसानों के चेहरे खुशी से खिल उठे।
जिन किसानों ने दो से 15 जून के बीच अपने निजी संसाधन से धान की अगैती नर्सरी डाल दी है, उनके लिए यह बारिश सोने पर सुहागा साबित हो रही है।
जिन किसानों ने एक जुलाई के बाद अपने खेतों में धान की नर्सरी डाली है, वह बारिश को देख मन ही मन पछता रहे हैं कि पहले नर्सरी डाले होते तो यह काफी फायदेमंद साबित होता।
जो पहले ही धान की नर्सरी डाल चुके हैं, उसमें से कुछ किसान रोपाई का कार्य भी शुरू कर दिए हैं, वहीं अधिकांश किसानों के खेतों की न ही जुताई हो पाई है और न ही खेतों से खर-पतवार ही नष्ट किए गए हैं, न ही वह मेड़बंदी ही कर पाए हैं।