मिर्जापुर। जिले में 139 विद्यालयों के जर्जर भवनों में खतरों के बीच 20 हजार छात्र-छात्राएं पढ़ने के लिए मजबूर हैं। कायाकल्प और अलंकार योजना के बाद भी इन विद्यालयों की दशा नहीं सुधर पाई। किसी की दीवार और छत पर दरारें पड़ गई हैं तो किसी की छत से पानी टपक रहा है।
पिछले दो साल में जिले के 18 माध्यमिक और 121 परिषदीय विद्यालय जर्जर घोषित किए जा चुके हैं। इन परिषदीय विद्यालयों में 17 हजार और माध्यमिक विद्यालयों में तीन हजार विद्यार्थी पढ़ रहे हैं। नगर में रैदानी काॅलोनी स्थित महर्षि दयानंद बालिका इंटर कालेज जर्जर भवन में चल रहा है। इसकी छत पर लगी कड़ियां जर्जर हो गई हैं। साथ ही पटियों के बीच में फासला बढ़ गया है। इस विद्यालय में 250 छात्राएं पढ़ रही हैं। प्रधानाचार्य शगुफ्ता परवीन ने बताया कि विद्यालय को जल्द ही ही नए भवन में शिफ्ट किया जाएगा।
कोन ब्लॉक के चेतगंज में स्थित राजकीय हाईस्कूल की पूरी बिल्डिंग जर्जर है। यहां 173 छात्र-छात्राओं का नामांकन हुआ है। छात्र-छात्राओं और शिक्षकों को हादसे का डर सताता रहता है। प्रधानाचार्य प्रभाकर उपाध्याय ने बताया कि पूरा भवन जर्जर हो चुका है। इसके बारे में विभाग को अवगत गया है लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। जिगना: छानबे क्षेत्र में शिक्षा विभाग द्वारा होलवा का पुरा, दुगरहा, कामापुर खुर्द समेत 15 विद्यालय जर्जर घोषित कर गिराने के लिए रिपोर्ट भेजी गई है। खंड शिक्षा अधिकारी राजेश श्रीवास्तव ने बताया कि जल्द ही जर्जर भवनों को गिराने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। पड़री : पहाड़ी ब्लॉक 40 जर्जर विद्यालय हैं। खंड शिक्षा अधिकारी फराह रईस ने बताया कि कंपोजिट विद्यालय जाैसरा, पचोखरा ,बेलवन, कोटवा के साथ ही साथ प्राथमिक विद्यालय बेरोहिया समेत 40 जर्जर विद्यालयों में 5000 विद्यार्थी पढ़ रहे हैं। वहीं, 51 विद्यालयों मरम्मत के लायक हैं। विभाग को जर्जर भवनों को गिराने और मरम्मत कराने के लिए पत्र भेजा गया है।
हलिया ब्लॉक के पूर्व माध्यमिक विद्यालय अहुगी खुर्द और प्राथमिक विद्यालय मगरविला का भवन जर्जर हो गया है। दोनों भवनों की छत से पानी टपकने के कारण विद्यार्थियों को परेशानी होती है। अहुगी खुर्द में बारिश के समय माध्यमिक विद्यालय की कक्षाएं आंगनबाड़ी केंद्र में चलती हैं।
कोट-
जिले में 121 परिषदीय विद्यालय जर्जर घोषित किए गए हैं। जो कक्ष जर्जर हैं, वहां पढ़ाई नहीं कराई जाती है। - अनिल कुमार वर्मा, बीएसए