सब्जी मंडी में दूकान पर लगीं हरी सब्जिया
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त्योहार के पूर्व खाद्य सामग्रियों सहित सब्जियों के दामों में इजाफे से गृहणियों के रसोईं का बजट गड़बड़ा गया है। लोग अपने बजट के अनुसार खरीदारी कर रहे हैं, वहीं दाल सहित सब्जियों के दाम बढ़ने से गरीबों को अब रोटी-दाल का इंतजाम करना भी मंहगा पड़ रहा है। पिछले वर्ष की अपेक्षा इस वर्ष दाल, तेल, घी, चीनी, आटा सहित सब्जियों के दाम सातवें आसमान पर पहुंच गए हैं।
खाद्य सामग्रियों पर बेतहाशा बढ़ रही मंहगाई से गृहणियों को रसोई चलाना अब भारी पड़ने लगने लगा है। नगर के प्रमुख बाजारों में गुरुवार को सरसों का तेल 120 से 130 रुपये प्रति किलो, वहीं अरहर का दाल 110 से 120 रुपये तथा रिफाइंड आयल 90 से 130 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बिके। दूकानदार महुवरिया निवासी कन्हैया गुप्ता के मुताबिक पिछले साल की तुलना में खाद्य सामग्रियों में 10 से 15 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है, बावजूद इसके बिक्री में कोई खास कमी देखने को नहीं मिल रही है।
नगर के सब्जी बाजारों में आलू 16 रुपये, परवल व पालक 35 से 40 रुपये तथा गोभी, बैगन व भिंडी 30 से 45 रुपये किलो के हिसाब से बिक रहे हैं। मंडी में हरी सब्जियों को फल की तरह सजा कर रखा गया है। जिन सब्जियों को ग्राहक पहले किलो दो किलो के हिसाब से लेते थे, वही सब्जियों को भोजन का स्वाद बढ़ाने के लिए अब ग्राम के हिसाब से खरीद रहे हैं। नगर क्षेत्र के वासलीगंज की गृहणी कुसुम गिरी, सत्ती रोड की गृहणी पूजा तिवारी रमईपट्टी की गृहणी कंचन रावत एवं धौरुपुर निवासी गृहणी रेखा पटेल ने बताया कि खाद्य सामग्रियों सहित सब्जियों के दाम में इजाफा होने से रसोई चलाना मुश्किल हो रहा है, लेकिन त्योहार को देखते हुए खान-पान में समझौता नहीं किया जा सकता।
उधर घंटाघर सब्जी मंडी के दूकानदार रामबाबू का कहना है कि त्यौहार के मौसम में खाद्य सामग्रियों सहित सब्जियों के दामों में इजाफा होने के बावजूद ग्राहक खान पान के प्रति कोई समझौता करते नहीं दिख रहे हैं। हालांकि सब्जियों के मूल्य घटते बढ़ते रहते हैं। लेकिन ऐन त्योहार के दौरान इनके मूल्य बढ़ने से वाकई लोगों के घ्ारों का बजट बिगड़ ही जाता है।