श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर विंध्यधाम में 11वां भव्य देवी जागरण का आयोजन किया गया। माता के जगराता के दौरान गोरखपुर से पधारे भजन सम्राट नंदू मिश्र ने अपने मधुर भजनों को देवी मां के चरणों में समर्पित किया।
देवी जागरण के दौरान कला-साधकों ने अपने उत्कृष्ट प्रस्तुतियों से श्रोताओं को झूमने को मजबूर कर दिया। श्रीकृष्ण जन्मोत्सव पर आयोजित ज्योति जागरण के दौरान कलाकरों को अंगवस्त्रम व स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया।
भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव पर विंध्यधाम में पूरी रात भक्ति रस की अविरल धारा बहती रही। मंदिर के आंगन में आयोजित भव्य देवी जागरण का शुभारंभ प्रधान श्रृंगारिया शिवजी मिश्र ने ज्योति पूजन करके किया।
इस अवसर पर विंध्याचल मंदिर की फूल-पत्तियों सहित रंगीन लाइटों से किया गया सजावट एक अलौकिक छटा बिखेर रहा था। वार्षिक आयोजन के तहत मां का विधि-विधान से श्रृंगार-पूजन एवं भक्तों के बीच मां का भोग प्रसाद वितरित किया गया।
भव्य देवी जागरण के दौरान गोरखपुर से पधारे प्रख्यात भजन गायक नंदू मिश्र ने अपनी एक से बढ़ कर एक प्रस्तुतियों से मां की आराधना की। उन्होंने कार्य्रक्रम की शुरूआत गणेश वंदना प्रस्तुत कर किया। तत्पश्चात् नंदू मिश्र ने- जब से विंध्याचल माई का दीदार हो गया, दूर जिंदगी का अभाव हो गया..तथा हमको विंध्यधाम जाना है..सहित शंकर भगवान, साईं बाबा, हनुमान जी, गंगा मईया के कई अन्य भजनों को प्रस्तुत कर भक्तों को झूमने पर मजबूर कर दिया।
देवी जागरण के दौरान कलाकार दीपक तिवारी ने- बधईया बाजे मोर अंगना..तथा अंजली दूबे ने- सातो रे बहिनियां..प्रस्तुुत कर भक्तिरस की बयार बहाई।
जागरण में विजय शंकर सोनी, प्रदीप सिंह एवं मिहिर मिश्रा सहित कई अन्य कलाकारों ने देवी गीतों की मधुर प्रस्तुतियों से भक्तों को भक्ति सागर में गोते लगाने को विवश कर दिया।
गुंजन मिश्र, रतन मिश्र, बंटी पाठक, आशीष शुक्ल, प्रशांत मिश्र, राजेश शुक्ल, सजन आदि मौजूद रहे।