संवाद न्यूज एजेंसी
लालगंज। चकबंदी के दौरान 200 बीघा भूमि से पट्टेदारों और किसानों के नाम निरस्त कर झाड़ी के नाम दर्ज किए जाने से धंसड़ा और सेमरी मगरदा गांव के प्रभावित किसान परिवारों में रोष है। धंसड़ा गांव में 125 बीघा भूमि लगभग 45 वर्ष पूर्व तत्कालीन ग्राम प्रधान के प्रस्ताव और सक्षम अधिकारियों की स्वीकृति के बाद गरीब परिवारों को पट्टे पर आवंटित की गई थी। चकबंदी के दौरान अभिलेखों के परीक्षण में वर्ष 1359 फसली में उक्त भूमि कृषि योग्य बंजर के रूप में झाड़ी के नाम दर्ज पाई गई। इसके बाद सहायक बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी अशोक कुमार तिवारी के निर्देश पर चकबंदी अधिकारी तेज बहादुर सिंह यादव ने पट्टेदारों के नाम निरस्त कर भूमि को झाड़ी के नाम दर्ज कर दिया।
वहीं, सेमरी मगरदा गांव में चकबंदी की कार्रवाई अंतिम चरण में है। धारा-45 की पर्चियां जारी होने के बाद 75 बीघा भूमि से किसानों के नाम भी निरस्त कर झाड़ी के नाम दर्ज कर दिया गया। किसान राममूरत, राजमणि, रंजीत, बेचूराम, रामनरेश, गणेश प्रसाद, राकेश कुमार, सुरजू प्रसाद, रामधारी, पकौड़ी लाल, मजनू राव, ओमप्रकाश और शांति देवी समेत अन्य ग्रामीणों का आरोप है कि बिना किसी पूर्व सूचना और पक्ष रखने का अवसर दिए 45 वर्षों से दर्ज उनके नाम निरस्त कर दिए गए।
उनका कहना है कि इस कार्रवाई से तीन दर्जन से अधिक परिवारों के समक्ष भूमिहीन होने का संकट खड़ा हो गया है।