सिटी क्लब में शुक्रवार को धरना देते कर्मचारी।
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पंचायत राज सेवा परिषद के तत्वावधान में जिला पंचायत राज अधिकारी बालेशधर द्विवेदी की अध्यक्षता में एक दिवसीय धरना सिटी क्लब में दिया। डीपीआरओ ने पंचायत राज विभाग को ग्राम्य विकास विभाग से मुक्त करने की पुरजोर मांग की। उन्होंने पंचायत विभाग के कर्मचारियों ने विभागीय कार्यक्रम संचालित करने का पूर्ण अधिकार देने की मांग किया। उन्होंने पंचायती राज विभाग के अधिकारियों, कर्मचारियों और कार्यों पर ग्राम्य विकास विभाग के नियंत्रण के लिए जारी शासनादेश को निरस्त करने की मांग किया।
डीपीआरओ ने कहा कि सामुदायिक विकास विभाग द्वारा जारी नियमावली के अनुसार अपर जिलाधिकारी और बीडीओ समन्वयक के रूप में काम करते थे, जो गैर विभागीय पद थे। जिलाध्यक्ष विनोद कुमार मिश्र ने कहा कि वर्ष 1987 में आयुक्त ग्राम्य विकास और पंचायती राज पद बनाकर विलय की कार्रवाई शुरु हुई। शासनादेश जारी होने के बाद ग्राम्य विकास और पंचायतीराज विभाग को बनाया गया।
जिला मंत्री रमेश चंद्र उपाध्याय ने कहा कि पंचायतीराज विभाग को संचालित करने का अधिकार पंचायती राज विभाग का है, बावजूद इसके ग्राम्य विकास विभाग कार्य और अधिकार में हस्तक्षेप कर रहा है।
ग्राम प्रधान संघ की जिलाध्यक्ष सुचिता त्रिपाठी ने कहा कि विकास खंड सीखड़ को खुले में शौच मुक्त बनाने का श्रेय पंचायत राज विभाग का है। इस दौरान संतोष श्रीवास्तव, राजेंद्र सिंह, विनोद गोंड, विजय मौर्य, प्रभाशंकर आजाद, पंकज सिंह, सत्य नारायण यादव, जय प्रकाश, मनोज कुमार, मनोज पांडेय, सत्येंद्र दूबे, संतोष मिश्रा आदि मौैजूद रहे।