मिर्जापुर। चील्ह थाना क्षेत्र के पुरजागिर में महिला की मौत मामले की सुनवाई करते हुए अपर सत्र न्यायाधीश जितेंद्र मिश्रा ने दोषसिद्ध पाते हुए महिला के पति को तीन वर्ष के कारावास की सजा सुनाई। साथ ही एक हजार के अर्थदंड से दंडित किया। अदालत ने
आदिनाथ ने 11 जून 2019 को चील्ह थाने में तहरीर देकर बताया कि वह अपनी पुत्री संजू की शादी इंद्रजीत बिंद पुत्र कृपाशंकर बिंद से किया था। 11 जून 2019 की शाम को उसकी पुत्री के मरने की सूचना रिश्तेदार ने दिया। अपनी पुत्री के घर आया तो देखा कि वह मृत पड़ी है। उसकी नातिन ने बताया कि उसके पिता द्वारा मां को मारा-पीटा गया था। नाराज होकर मां ने घर में साड़ी से फंदा लगा दिया। चील्ह थाने में पहले आत्महत्या के लिए प्रेरित करने का मुकदमा दर्ज हुआ। इसके बाद विवेचना में मिले साक्ष्य के बाद हत्या का मुकदमा दर्ज हुआ। न्यायालय में हत्या का सिद्ध नहीं हो सका। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी काशीनाथ सिंह ने कहाकि आरोपी पति द्वारा अपनी पत्नी को आत्महत्या के लिए उकसाया गया। जिससे वह क्षुब्ध होकर आत्महत्या कर ली। मृतका दिव्यांग थी। उसके चार छोटे बच्चे थे। ऐसी दशा में दोषसिद्ध को अधिकतम दंड से दंडित किया जाए। बचाव पक्ष ने आरोपी के दिव्यांग होने की बात कहकर कम सजा दिए जाने की बात कही। अपर सत्र न्यायाधीश जितेंद्र मिश्रा ने अधिवक्ताओं की दलील और पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्य के आधार पर दिव्यांग पत्नी के आत्महत्या के लिए प्रेरित करने के आरोप में दिव्यांग पति इंद्रजीत बिंद को तीन वर्ष के सश्रम कारावास से दंडित किया। एक हजार के अर्थदंड से भी दंडित किया। अर्थदंड ने देने पर एक सप्ताह की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।