वैशाख मास की कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि पर रविवार को सिद्धपीठ विंध्याचल धाम में घटाभिषेक महापर्व मनाया जाएगा।
आध्यात्मिक गुरु आचार्य त्रियोगी मिट्ठू मिश्र ने बताया कि यह महापर्व एक पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठान है।
इस दिन हजारों श्रद्धालु गंगा तट से मिट्टी के घड़े में गंगा जल भरकर, नंगे पांव मां विंध्यवासिनी के दरबार पहुंचते हैं। मां विंध्यवासिनी के मंदिर सभी विग्रहों का गंगाजल से अभिषेक करते हैं।
मां विंध्यवासिनी के चरणों से गिरने वाला गंगाजल सीधे गुप्त गर्भकुंड में स्थित ब्रह्मा, विष्णु और महेश के विग्रह पर गिरता है। पूरा आयोजन विंध्य पंडा समाज के निर्देशन में होता है।
त्रियोगी मिट्ठू मिश्र ने बताया कि घटाभिषेक से विंध्यक्षेत्र सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इसे ऊर्जा शुद्धिकरण पर्व भी कहा जाता है।
मिट्टी के घड़े को श्रद्धालु साल भर अपने घरों में सुरक्षित रखते हैं। रहस्यमयी त्रिदेव कुंड वर्ष में सिर्फ एक बार घटाभिषेक के दिन खोला जाता है। श्रीमद् देवीभागवत के अनुसार, त्रिदेवों को शक्ति आदि शक्ति देवी से ही प्राप्त होती है। यह पर्व उसी दिव्यता का प्रत्यक्ष प्रमाण है।