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कार्यदायी एजेंसियों के विवाद में फंसा कूड़ा प्लांट

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स्वच्छ भारत मिशन की मुहिम को सालिड वेस्ट मैनेजमेंट योजना मुंह चिढ़ा रही है। नगर पालिका परिषद मिर्जापुर की महत्वाकांक्षी योजना सालिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट (एसडब्लूएमपी) दो कंपनियों की आपसी लड़ाई का शिकार हो गई है। इस योजना का बंटाधार तो हुआ ही करोड़ों की मशीनें भी पड़े- पड़े जंक खा रही हैं।
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नगर पालिका क्षेत्र से रोजाना निकलने वाले 142 टन कूड़े के निस्तारण के लिए वर्ष 2011 में नगर पालिका परिषद की ओर से सालिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट योजना तैयार की गई थी। नगर के निकलने वाले कूड़े से बिजली तैयार करने व खाद बनाने का संयंत्र स्थापित किया जाना था। इसके लिए 11.20 लाख की लागत से एक संयंत्र नगर विकास खंड के टांड़ गांव में लगना शुरू हुआ। इसके लिए शासन की ओर से कार्यदायी संस्था सीएनडीएस को कार्य कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई। सीएनडीएस ने कार्य कराना शुरू किया। योजना के मुताबिक कूड़ों से एक मेगावाट बिजली का उत्पादन होना था और उसके अवशिष्ट से खाद बनाया जाना था। साथ ही निकलने वाली पानी का शोधन कर खेत की सिंचाई के लिए इस्तेमाल होना था। इसके लिए शासन की ओर से कार्यदायी संस्था को साढ़े छह करोड़ रुपये भी दे दिए गए थे। काम शुरू हो गया था। इसी बीच कार्यदायी संस्था ने यह कार्य किसी और कंपनी को दे दिया और बजट को लेकर उन दोनों कंपनियों में विवाद हो गया। दोनों कंपनियां न्यायालय चली गई। इसी के बाद काम ठप हो गया और आज तक वह कार्य शुरू नहीं हो सका है। करोड़ों रूपये की मशीनों में धूप और पानी के साथ जंक लग रहा है। पालिका का कहना है कि मामला न्यायालय में है। इसलिए कुछ कहा नहीं जा सकता। हां, यह जरूर है कि इससे कूड़ा निस्तारण की मुहिम को झटका जरूर लगा है।
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