गंगा का जलस्तर तेजी बढ़ने से जिले के तटवर्तीय इलाकाें में बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। बुधवार की सांयकाल गंगा का जलस्तर 75.720 मीटर रिकार्ड किया गया, जबकि मंगलवार की संायकाल जलस्तर 74.750 मीटर रहा। पूरे दिन गंगा छह सेंटीमीटर प्रति घंटे के हिसाब से बढ़ती रहीं। खतरे का निशान 77.724 है। जलस्तर खतरे के निशान से करीब दो मीटर नीचे है। इससे रोजाना गंगा में कटान हो रहा है।
गंगा का रौद्र रूप देख कर तटवर्तीय इलाके के ग्रामीणों व किसानाें की चिंता बाढ़ को लेकर बढ़ गई हैं। पिछले हफ्ते गंगा के जलस्तर कम होने से लोगों ने राहत की सांस ली थी। फिर जलस्तर बढ़ने से तटवर्ती गांवों के लोग सारी रात जागने को मजबूर हैं। जल आयोग के अधिकारियों के मुताबिक मेजा व अदवा बांध से पानी छोड़ने से जलस्तर में बढ़ोत्तरी हुई है। बाढ़ से निपटने के लिए निर्धारित स्थानों पर चौकियाें की स्थापना की गई है, जहां से 24 घंटे कर्मचारी निगरानी पर लगे हुए हैं।
जिगना संवाददाता के अनुसार क्षेत्र के अकोढ़ी, बबुरा, अधवार, जोपा, नौगांव, बभनी, देवरी, बिरोही, महरौड़ा, भटेवरा, अर्जुनपुर, नौगांव, हरगढ़, भौरुपुर, कोठरा मिश्रान, परमानपुर, डंगहर सहित कई अन्य गांवाें में बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। गंगा का जलस्तर बढ़ने से कर्णावती नदी में उफान के कारण अकोढ़ी-बबुरा मार्ग पर पानी पहुंच जाने आवागमन बाधित हो गया है। गंगा की तेज धार को देख कर लोग सहम गए हैं। चील्ह संवाददाता के अनुसार क्षेत्र के सेमरा, खुल्हुआं, तिलठी, हरसिंगपुर, मल्लेपुर, मवैया, लखनपुर, जगदीशपुर, मझिगवां, पुराने बाड़ा, मलाधरपुर, चील्ह, भटेवरा, डिंगूरपट्टी, दलापट्टी, कमासिन, कोल्हुआं, गहिया, गड़गेड़ी, रामपुर, चेकसारी, मुजेहरा सहित कई अन्य गांवाें के समीप गंगा का पानी पहुंच चुका है।
गंगा का उफान देख कर ग्रामीण व किसान अपने नए ठौर-ठिकाने की तलाश भी शुरू कर दिए हैं। इसी तरह जनपद के पड़री, सीखड़, चुनार, नरायनपुर के तटवर्तीय इलाकों में बसे ग्रामीण व किसानों को बाढ़ की चिंता सताने लगी है, जिससे वह सक्रिय होकर बाढ़ से निपटने की तैयारी में जुट गए हैं। लोग ऊंचाई वाले स्थानों पर िठकाना तलाशने में जुट गए हैं। एक बार पानी कम होने के बाद दोबारा बढ़ने से लोग परेशान हैं।