मिर्जापुर। एकीकृत बागवानी विकास मिशन योजनान्तर्गत गुरुवार को विकासखण्ड सीटी के ग्राम नुआंव में जिलाधिकारी सुशील कुमार पटेल की अध्यक्षता में प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कृषकों को औद्यानिक खेती में आधुनिक तकनीकों के प्रयोग, पाली हाउस, माइक्रोइरीगेशन, औषधीय खेती आदि के विषय में विस्तृत जानकारी दी गयी। प्रशिक्षण कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में विधायक सुचिस्मिता मौर्या रहीं। सर्वप्रथम जिला उद्यान अधिकारी मेवाराम ने कृषकों को नमामी गंगे के विषय में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री की मंशानुसार गंगा नदी के किनारे के गांवों में पौध रोपण का कार्य प्राथमिकता के आधार पर किया जाना है। कार्यक्रम में कृषकों को बताया कि इसके अतिरिक्त जनपद में ड्रैगन फ्रूट की खेती व बायोगैस प्लांट भी लगाया जा रहा है। जिला उद्यान अधिकारी ने बताया कि जनपद में औषधीय पौधों की खेती भी कराया जा रहा है, जिन कृषकों के पास खाली जमीन है जिस पर कोई उत्पादन नहीं हो रहा वहां आसानी से सतावर आदि की खेती करायी जा सकती है जिसे न तो जानवर नुकसान पहुंचा पाएगा। 14 माह बाद एक हेक्टेयर प्रक्षेत्र से 2-3 लाख की आय भी प्राप्त कर सकते हैं। विधायक मझवा ने राजकीय गंगा पौधशाला विसुंदरपुर का उद्घाटन किया।
पाली हाउस के माध्यम से समय से पूर्व शाकभाजी व फूलों की खेती आसानी से की जाती है। जिलाधिकारी ने कृषकों से आह्वान किया कि परम्परागत खेती को छोड़कर अब समय आ गया है कि खेती में वैज्ञानिक तकनीकों का प्रयोग करें तथा भविष्य को ध्यान में रखते हुये पानी की बचत करें तथा सिंचाई हेतु माइक्रोइरीगेशन पद्धति का प्रयोग अधिक से अधिक करें। मुख्य विकास अधिकारी अविनाश सिंह ने कृषकों को बताया कि आज जरूरत है कि धान, गेहूँ की खेती के साथ-साथ कृषक नकदी फसलों की तरफ अपना रूझान बढ़ायें जिससे उनकी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हो सके। वरिष्ठ वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केन्द्र श्रीराम सिंह ने औद्यानिक फसलों के विषय में जानकारी दी तथा कृषकों के सवालों का जवाब दिया। कार्यक्रम का संचालन सहायक उद्यान निरीक्षक पुष्पेन्द्र त्रिपाठी,ने किया।