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यूक्रेन में फंसे छात्र के परिजन चिंतित

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यूक्रेन और रूस के बीच चल रहे भीषड़ युद्ध के बीच कई भारतीय भी उस देश में फंसे हुए हैं और रेस्क्यू का इंतजार कर रहे हैं। मिर्जापुर के मड़िहान थाना अंतर्गत नदिहार निवासी अमन सिंह भी यूक्रेन की राजधानी कीव के एक बंकर में छिपे हैं। अमर उजाला से बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि वे एक बिल्डिंग के बंकर में मौजूद हैं जहां उनके साथ कई और भारतीय छात्र भी हैँ। अमन ने बताया कि थोड़ी थोड़ी देर पर धमाकों की आवाज सुनाई दे रही है। मीडिया और लोगों से जानकारी मिल रही है कि रूस की सेना हमसे कुछ ही किलोमीटर दूर है।एक सवाल के जवाब में छात्र ने बताया कि यूक्रेन वासी शहर छोड़कर जा रहे हैं। उनके मकान मालिक ने भी घर छोड़ दिया है। वे और 12-13 छात्र उसी बिल्डिंग के बेसमेंट में छिपे हैँ। इनमें यूपी के अलावा दक्षिण भारत के विभिन्न राज्यों के युवा हैं। अमन ने बताया कि हम सभी ने पूरी रात बंकर में बिताई। सुबह आठ बजे के लगभग वे फ्लैट में गए थे पर फिर से उन्हें बेसमेंट में शरण लेनी पड़ी। कीव मेडिक कॉलेज में एमबीबीएस के तृतीय वर्ष के छात्र अमन ने बताया कि उनके कालेज के बेसमेंट में डेढ़ से दो सौ लोग जान बचाने के लिए छिपे हैं। शहर की परिवहन व्यवस्था ठप कर दी गई है। साथ ही दुकानें भी बंद है। हालांकि उन सभी ने पहले ही एडवायजरी के अनुसार पर्याप्त मात्रा में पैकेट बंद खाद्य पदार्थ खरीद कर रख लिया है।
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सता रहा एयर स्ट्राइक का डर
अमन ने बताया कि मीडिया पर लगातार एयर स्ट्राइक को लेकर चेताया जा रहा है। साइरन की आवाजें सुनाई दे रही हैं। बस भगवान से सभी की सुरक्षा की प्रार्थना कर रहे हैं। यूरोप से लगते यूक्रेन के सीमावर्ती शहरों से कई भारतीयों को निकाला गया है। वहां से कीव की दूरी 600 किलोमीटर से ज्यादा है। ऐसे में वहां तक पहुंचना इन छात्रों के लिए बड़ा जोखिम साबित हो सकता है। ऐसे में बंकर में ही रुककर वे मदद का इंतजार कर रहे हैं।
हर भवन में है बंकर- यूक्रेन में बनने वाले सभी भवनों में बंकर हैं। बिना बंकर के घर नहीं बना सकते। परमाणु दुर्घटना के बाद से ही वहां पर बंकर बनाना अनिवार्य है। ऐसे में लोग ऐसे ही बंकरों में शरण ले रहे हैं।
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राजगढ। मड़िहान थाना क्षेत्र के नदीहार गांव निवासी त्रिभुवन सिंह का पुत्र अमन सिंह यूक्रेन की राजधानी कीव में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहा है। वहां पढ़ाई का उसका तीसरा साल है। युद्ध होने की वजह से वह वहां पर फंसा गया है।
परिजन चिंतित हैं और समय समय पर उसका हाल चाल ले रहे हैं। साथ ही उन्होंने भारत सरकार से छात्र को सुरक्षित वापस लाने की गुहार लगाई है। त्रिभुवन सिंह ने बताया कि जब से युद्ध की चर्चा जब से शुरू हुई है तब से उसकी मां का रो- रो कर बेहाल है। उन्होंने बताया कि शुक्रवार की दोपहर में ही मोबाईल से बेटे से बात हुई है। उसने बताया कि भारतीय दूतावास से जानकारी मिली है कि भारत से पढ़ने आने वाले छात्रों को सुरक्षित निकालने की व्यवस्था की जा रही है। सभी भारतीयों को जगह-जगह बनाए गए बंकर में सुरक्षित रखा गया है। जल्द ही भारत से दो जहाज आने वाले हैं। जिसमें सबसे पहले पंजाब एवं यूपी के छात्रों को बाहर निकाल कर सुरक्षित भारत लाया जाएगा। पिता ने भारत सरकार से वहां फंसे अपने पुत्र को सुरक्षित वापस लाने की गुहार लगाई है।त्रिभुवन सिंह को दो पुत्र एक पुत्री है। सबसे बड़ा बेटा अमन सिंह एमबीबीएस की पढ़ाई करने के लिए तीन वर्ष पूर्व यूक्रेन की राजधानी किव गया है। दूसरा बेटा अभय सिंह रुड़की इंजीनियरिंग की परीक्षा पास कर उत्तराखंड में इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहा है। बेटी पूजा सिंह एनआईटी की परीक्षा पास कर लखनऊ से इंजीनियरिंग कर रही है।
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