कछवां में सूखे तालाब में खेलते बच्चे। अमर उजाला
विकास खंड कोन में तालाबों का अस्तित्व पर संकट मंडरा रहा है। अधिकांश तालाबों पर अतिक्रमण कर लिया गया है। इससे गांववालों को अपने पशुओं को पानी पिलाना भी मुश्किल हो रहा है। ग्रामीणों के अलावा अतिक्रमण करने वालों में सरकारी विभाग भी पीछे नही हैं। ग्रामीण अभियंत्रण विभाग ने तालाब पर ही सड़क बना दिया है जिससे राह तो आसान हुई लेकिन ग्रामीणों को इसकी कीमत पानी संकट के रूप में चूकाना पड़ रहा है।
विकास खंड कोन की आबादी लगभग दो लाख है। यहां कागज पर 38 तालाब दर्ज हैं। इनमें से ज्यादातर के अस्तित्व पर संकट मंडरा रहा है। पांच तालाबों की खुदाई कर उनमें मुख्यमंत्री जल संचय योजना के तहत पानी भरवाये जाने की योजना है। वर्ष 2007 से वर्ष 2010 तक 20 तालाब मनरेगा के तहत बनाये गए हैं उनकी सीबीआई जांच चल रही है।
इन तालाबों में यथा स्थिति बनाई जा रही है।
12 तालाबों में प्रशासन पानी भरवाने का दावा कर रहा है। छह तालाबों पर लोगों ने कब्जा जमा लिया है। ग्रामसभा चिंदलिक में ग्रामीण अभियंत्रण विभाग ने तालाब की भूमि को पाट कर तीन तरफ से सीसी सड़क बना दिया है। अब इस तालाब का अस्तित्व समाप्त हो गया है। चिंदलिक में एक और तालाब है जिसको पाट कर खेती की जा रही है। मिश्रधाप, दुर्गापुर, भोगांव में तालाबों पर कब्जा किया जा चुका है। इससे न सिर्फ लोगों को नहाने और अन्य कार्यों के लिए पानी की किल्लत बनी हुई है बल्कि पशुपालकों को पशुओ ंको पानी पिलाने के लिए भी दर-दर भटकना पड़ रहा है।