शहरनामा की फोटो---विश्राम दिवस पर देवी भागवत कथा सुनाते डॉ. बालगोविंदाचार्य महाराज।-सोशल मीडिया
मिर्जापुर। गुप्त नवरात्रि पर विंध्याश्रम में श्रीमद्देवीभागवत महापुराण कथा के विश्राम दिवस पर बुधवार को श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का संगम देखने को मिला। कथा पंडाल में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। मां भगवती के जयघोष, भजन-कीर्तन और आरती से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। श्रद्धालु पूरे समय कथा सुनने में लीन रहे। मां भगवती की आराधना कर सुख-समृद्धि और कल्याण की कामना की।
कथावाचक डॉ. बाल गोविंदाचार्य महाराज ने श्रीमद्देवीभागवत महापुराण के राजा सुरथ एवं समाधि वैश्य के प्रसंग का वर्णन करते हुए कहा कि जब मनुष्य संसार के मोह, दुख और निराशा से घिर जाता है, तब उसे ईश्वर की शरण ही सच्चा मार्ग दिखाती है। राजा सुरथ ने राज्य खोने के बाद और समाधि वैश्य ने सांसारिक मोह से पीड़ित होकर महर्षि मेधा की शरण ली। महर्षि के निर्देश पर दोनों ने आदिशक्ति मां भगवती की कठोर उपासना की। मां की कृपा से राजा सुरथ को फिर से अपना राज्य प्राप्त हुआ, जबकि समाधि वैश्य को आत्मज्ञान और मोक्ष की प्राप्ति हुई। मां भगवती केवल सांसारिक सुख ही नहीं, बल्कि आत्मिक शांति और जीवन का सही मार्ग भी प्रदान करती हैं। सच्ची श्रद्धा, निष्काम भक्ति और सेवा भाव से की गई आराधना कभी निष्फल नहीं जाती। जब मनुष्य अहंकार त्यागकर देवी की शरण में जाता है, तब जीवन के भय, दुख, संकट और भ्रम स्वतः समाप्त होने लगते हैं। श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि आधुनिक जीवन की भागदौड़ में भी धर्म, संस्कार और आध्यात्मिकता को जीवन का आधार बनाएं। माता की उपासना केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि सत्य, करुणा, सेवा और सदाचार का पालन करना भी देवी आराधना का स्वरूप है।