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Mirzapur News: गुड़हल, कमल और गुलाब के फूलों से सजीं मां के श्रद्धालुओं ने किए दर्शन

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विंध्याचल वी-वीआईपी मार्ग पर मंगलवार को श्रद्धालुओं से पटा रहा फोटो, संवाद
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-कालीखोह और अष्टभुजा मंदिर पहुंचकर माता काली और अष्टभुजी देवी का किया दर्शन
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संवाद न्यूज़ एजेंसी

विंध्याचल। जगत कल्याणी मां विंध्यवासिनी की चौखट पर शीश नवाने मंगलवार को श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। चैत्र नवरात्र की षष्ठी तिथि पर मंगलवार को मंदिर पहुंचे आस्थावानों ने दर्शन कर मंगल कामना की। गुड़हल, कमल और गुलाब के पुष्पों से किया मां का भव्य शृंगार का दर्शन पाकर श्रद्धालु भाव विभोर हो उठे।
भोर में मंगला आरती और शृंगार पूजन के बाद विंध्यवासिनी मां के दिव्य स्वरूप का दर्शन कर भक्त निहाल हो उठे। सुबह से लेकर देर रात तक विंध्यवासिनी मंदिर में माता की जय जयकार गूंजती रही। षष्ठी तिथि पर देश के कोने-कोने से आए भक्तों ने देवी दरबार में मत्था टेका। गंगा स्नान कर घंटों कतार में खड़े होने के बाद माता के दरबार में पहुंचे श्रद्धालु एक झलक पाने को बेताब दिखे। घंटा, घड़ियाल, शंख के साथ बजते नगाड़े की धुन के बीच पहाड़ा वाली के जयघोष से मंदिर परिसर गुंजायमान हो रहा था। मंदिर की छत पर जगह-जगह आसन बिछा कर बैठे साधकों का पूजन अनुष्ठान जारी रहा। मां विंध्यवासिनी के दर्शन के बाद नंगे पांव श्रद्धालु कालीखोह और अष्टभुजा पहुंचकर मां काली और अष्टभुजा देवी के दर्शन कर भाव विभोर रहे।
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घाटों पर गंगा स्नान करने उमड़े भक्त

धाम क्षेत्र के गंगा घाटों पर छठवें दिन पर स्नान ध्यान के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रही। सुरक्षा की दृष्टि से गंगा में बैरिकेडिंग लगाई गई है। वहीं गोताखोर और महिला पुलिस बल की भी तैनाती गंगा घाट पर कराई गई है। सफाई के साथ ही गंगा घाटों पर वस्त्र बदलने के लिए अस्थाई टेंट का भी निर्माण कराया गया। मंगलवार को पूरे दिन पुलिस के जवान गंगा घाटों पर भ्रमण करके सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेते दिखे।



भजन कीर्तन से गुलजार नजर आए मंदिर

चैत्र नवरात्र मेले की षष्ठी तिथि पर विंध्य क्षेत्र के मंदिरों में शाम होते ही भजन कीर्तन का दौर शुरू हो गया था। ढोलक मंजीरे की थाप पर श्रद्धालु मधुर भजनों को प्रस्तुत कर देवी मां की आराधना करते रहे। अष्टभुजा के साथ ही विंध्याचल के आसपास इलाकों में स्थित प्रमुख मंदिरों पर भजन कीर्तन का कार्यक्रम अनवरत चलता रहा।
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सृष्टि के प्रारंभ से ही मां की होती रही है पूजा: त्रियोगी मिट्ठू मिश्र

विंध्याचल। शेरकोठी निवासी आध्यात्मिक धर्म गुरु त्रियोगी मिट्ठू मिश्र ने कहा की राज राजेश्वरी मां त्रिपुर सुंदरी माता विंध्यवासिनी आद्या शक्ति है। उनका न कोई आदि है न कोई अंत है। मां विंध्यवासिनी की आराधना सभी युगों में होती रही है। कहा वैसे तो विंध्य पर्वत काफी विस्तृत है, किंतु पौराणिक मान्यता के अनुसार गंगोत्री से निकली गंगा यात्रा में त्रिवेणी संगम के बाद विंध्य पर्वत से ही संगम करती हैं। विंध्य धाम में भागीरथी गंगा मां विंध्यवासिनी के इस शक्ति स्थल को स्पर्श करने के लिए चंद्राकार होकर कल कल करती बहती हैं। जिस स्थल पर भागीरथी गंगा विंध्य पर्वत का स्पर्श करती हैं उसे ही मणिद्वीप कहा जाता है। आध्यात्मिक धर्म गुरु ने कहा कि मां विंध्यवासिनी माता की आराधना का वर्णन श्रीमद्देवीभागवत के दशम स्कंध में मिलता है, जिसमें कथा आती है की सृष्टिकर्ता ब्रह्माजी ने जब सबसे पहले अपने मन से स्वयं भुव मनु और शतरूपा को उत्पन्न किया। तब विवाह करने के उपरांत स्वयंभुव मनु ने अपने हाथों से देवी की मूर्ति बनाकर सौ वर्षो तक कठोर तप किया। उनकी तपस्या से संतुष्ट होकर भगवती ने उन्हें निष्कंटक राज्य, वंश-वृद्धि एवं परम पद पाने का आशीर्वाद दिया। वर देने के बाद महादेवी विंध्याचल पर्वत पर चली आई। विंध्य पर्वत पर आने के कारण ही इनका एक नाम विंध्यवासिनी पड़ गया। इससे यह स्पष्ट होता है कि सृष्टि के प्रारंभ से ही विंध्यवासिनी की पूजा होती रही है।

विंध्याचल वी-वीआईपी मार्ग पर मंगलवार को श्रद्धालुओं से पटा रहा फोटो, संवाद

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