विंध्याचल। वैशाख शुक्ल पक्ष पूर्णिमा तिथि पर सोमवार को मां विंध्यवासिनी के दर्शन-पूजन के लिए श्रद्धालुओं रेला उमड़ पड़ा। मंगला आरती के बाद भोर से शुरू हुआ दर्शन-पूजन का सिलसिला दिन भर चलता रहा। इस दौरान श्रद्धालुओं ने बच्चों का मुंडन व जनेऊ संस्कार कराया। स्नान-ध्यान के लिए विभिन्न गंगा घाटों पर भी भीड़ रही।
गंगा घाटों पर स्नान-ध्यान के बाद श्रद्धालु सीधे मंदिर पहुंचे और दर्शन के लिए कतारों में लग गए। किसी ने गर्भगृह तो किसी ने झांकी से मां विंध्यवासिनी के दर्शन किए। इसके बाद भक्तों ने मंदिर परिसर में विराजमान देवी-देवताओं के मंदिरों में जाकर मत्था टेक कर सुख और समृद्धि की कामना की। वैशाख शुक्ल पक्ष पूर्णिमा तिथि को देखते हुए जिला एवं पुलिस प्रशासन की ओर से सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए थे। इस दौरान पंडा समाज के अध्यक्ष पंकज द्विवेदी, धाम चौकी प्रभारी राज कुमार पांडेय के अलावा पुलिस एवं पीएसी के जवान मुस्तैद रहे।
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मां काली और अष्टभुजा देवी के किए दर्शन
विंध्याचल। मां विंध्यावासिनी के दर्शन के बाद अधिकांश श्रद्धालु त्रिकोण मार्ग पर विराजमान माता काली और अष्टभुजा मंदिर पहुंच कर दर्शन पूजन किया। ज्यादातर श्रद्धालु नंगे पांव कालीखोह पहुंचे और दर्शन किए। इसके बाद मंदिर के पीछे स्थित सीढि़यों पर चढ़कर पहाड़ी रास्ते होते हुए अष्टभुजा देवी मंदिर पहुंचकर शीश नवाया। दर्शन पूजन के दौरान श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं।
तीस हजार देवी भक्तों ने मां शीतला के किए दर्शन
हलिया। वैशाख शुक्ल पक्ष पूर्णिमा पर सोमवार को गड़बड़ा धाम पहुंचकर तीस हजार से अधिक देवी भक्तों ने मां शीतला का दर्शन-पूजन किया। मंगला आरती के बाद भोर में मंदिर के कपाट खुलते ही माता शीतला के दर्शन पूजन के लिए भक्तों का तांता लग गया। मां शीतला के दर्शन पूजन का सिलसिला देर शाम तक चलता रहा। मां शीतला के दर्शन-पूजन के साथ ही श्रद्धालुओं ने बच्चों का मुंडन तथा जनेऊ संस्कार कराया। भक्तों ने मेला क्षेत्र का भ्रमण कर घर-गृहस्थी का सामान खरीदा। पुजारी मंगलधारी मिश्रा ने बताया वैशाख शुक्ल पक्ष पूर्णिमा पर तीस हजार से अधिक भक्तों ने माता के दरबार में शीश नवाया। संवाद