श्रावण शुक्ल दशमी तिथि पर विंध्य दरबार में मां का दर्शन-पूजन करने के लिए भक्तों का रेला उमड़ पड़ा। श्रद्घालुुुओं ने मंदिर पहुंच बड़े ही श्रद्घाभाव से मंदिर में पूजन-अर्चन कर सुख-समृद्घि के लिए कामना किया।
जगत जननी मां विंध्यवासिनी का फूलों से किया गया भव्य श्रृंगार दर्शन पाकर श्रद्घालु निहाल हो उठे। घंटा-घड़ियाल, शंख, नगाड़ा व मां के जयकारे से वातावरण देवीमय हो रहा था। मंदिर की फूलों से की गई सजावट अलौकिक छटा बिखेर रही थी।
मंगलवार की भोर से ही विंध्यधाम में भक्तजनों के आने का सिलसिला शुरू हो गया था, जो देर रात तक अनवरत चलता रहा। मंदिर की छत पर साधक जहां एक ओर कतार में बैठकर साधना करने में तल्लीन रहे, वहीं दूसरी तरफ शहनाई की धुन पर लोग अपने-अपने बच्चों का मुुंडन संस्कार कराते रहे।
मंदिर में उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के चलते विंध्य क्षेत्र की सातों गलियां श्रद्धालुओं से पटी रही। माला-फूल, नारियल चुनरी, लाचीदाना, रोरी-रक्षा लेकर भक्तजन विंध्यधाम में पहुंचकर मां का दर्शन-पूजन किया।
घंटो कतार में खड़े रहने के बाद मंदिर पहुंचने पर किसी ने झांकी से तो किसी ने गर्भगृह में पहुंचकर मां का दीदार कर मंगलकामना की। मां विंध्यवासिनी देवी का दर्शन-पूजन करने के बाद भक्तों ने मंदिर में विराजमान देवी-देवताओं के मंदिरों में पहुंचकर पूजन-अर्चन कर सुख-समृद्घि के लिए कामना किया।
विंध्याचल में दर्शन-पूजन करने के बाद बड़ी संख्या में भक्तजनों ने अष्टभुजा पहाड़ पर जाकर मां काली व मां अष्टभुजा देवी का दर्शन-पूजन कर त्रिकोण परिक्रमा कर पुण्य के भागी बने। विंध्याचल के गंगा घाटों पर स्नान करने के लिए श्रद्घालुओं का तांता लगा रहा।
गंगा घाट पर कीचड़ के साथ ही सफाई की उचित व्यवस्था न होने से भक्तों को असुविधा का भी सामना करना पड़ा। मंदिर में उमड़ी दर्शनार्थियों की भीड़ के चलते सुरक्षा-व्यवस्था तगड़ी रही।