नवरात्र के प्रथम दिन मां विंध्यवासिनी का दर्शन-पूजन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। आस्थावानों ने देवीधाम में शीश नवा कर मंगलकामना की। पुष्पों व रत्नजड़ित आभूषणों से मां का शृंगार का दर्शन पाकर श्रद्धालु निहाल हो उठे। शाम तक तीन लाख लोगों ने दर्शन किया। शारदीय नवरात्र के पहले दिन विंध्याचल धाम में दर्शन-पूजन करने के लिए आस्थावानों की भीड़ उमड़ पड़ी। भोर में तीन बजे मां विंध्यवासिनी के मंगला आरती के उपरांत से ही मंदिर में दर्शन-पूजन का सिलसिला शुरू हो गया, जो देर रात तक चलता रहा।
मंदिर के छत पर जहां साधक जगह-जगह बैठ कर वैदिक मंत्रोच्चार बीच साधना करने में तल्लीन दिखाई दिए, वहीं दूसरी ओर शहनाई के धुन पर मुंडन संस्कार का दौर अनवरत चलता रहा। घंट-घड़ियाल, शंख, नगाड़ा एवं माता के जयकारे से पूरा विंध्याचल धाम देवीमय हो रहा था।
विंध्य की गलियों में कतार में खड़े श्रद्घालु मां का जयघोष करते मंदिर की तरफ बढ़े जा रहे थे। मंदिर में सुबह और शाम की अपेक्षा दोपहर में श्रद्घालुओं की भीड़ कम देखी गई। विंध्यधाम में उमड़ी श्रद्घालुओं की भीड़ को देखते हुए पुलिस प्रशासन की तरफ से सुरक्षा-व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम रहे। मेला प्रभारी सिटी मजिस्ट्रेट चंद्रप्रकाश ने बताया कि शाम तक तीन लाख लोगों ने मंदिर में मत्था टेका। जानकारों का कहना है कि पिछले साल की तुलना में मेले में इस साल कम लोग आए हैं, जिसकी वजह बाढ़ है।
लाखों लोगों ने परिक्रमा भी की। अष्टभुजा पहाड़ के कालीखोह स्थित मां काली और मां अष्टभुजी देवी के दरबार पहुंचे भक्तों ने श्रद्घाभाव से दर्शन-पूजन कर मंगलकामना की। गुड़हल, कमल व गुलाब के पुष्पों से मां का किया गया भव्य श्रृंगार का दर्शन पाकर श्रद्घालु भावविह्वल हो उठे। घंटा-घड़ियाल, शंख एवं माता के जयकारे से मंदिर गुंजायमान हो रहा था।