मसवासी क्षेत्र की हरी मिर्च ने दूसरे राज्यों में मचाई धूम
जिले में प्राकृतिक आपदाओं के चलते किसान बेहद परेशान हैं। कभी सूखा तो कभी बाढ़ के चलते किसानों की मेहनत पर पानी फिर जा रहा है। इससे किसान धीरे धीरे खेती किसानी से मुंह मोड़ते जा रहे हैं। जिले में विगत तीन वर्षों में किसानों को जबरदस्त आघात लगा है। गेहूं की फसल को अतिवृष्टि ने बर्बाद किया तो धान की खेती सूखे के कारण बर्बाद हो गई।
वर्ष 2013 में बाढ़ से पहले किसानों की खेती बर्बाद हुई। फिर वर्ष 2014 में सूखे से धान की फसल समाप्त हो गई। वर्ष 2015 में फसलों में रोग लगने के कारण किसानों की मेहनत पर पानी फिरा। यही हाल इस वर्ष भी रहा जब बारिश अच्छी होने से धान की फसल के अच्छा होने का संके त मिला था लेकिन बाढ़ ने किसानों को तबाह कर दिया। कई स्थानों पर तो धान की पूरी फसल ही डूब गई। सब्जी की खेती करने वाले किसान तो पूरी तरह से लुट गए।
छानबे ब्लॉक के गंगा किनारे के गांवों में किसानों ने अच्छे मानसून को देखते हुए कर्ज लेकर सब्जी की खेती की थी लेकिन गंगा में आई बाढ़ ने उन्हें कहीं का नहीं छोड़ा। किसान अब मुआवजा की बाट जोह रहे हैं लेकिन अभी तक क्षति का आकलन ही शुरू नहीं हुआ। प्रशासन मुजावजे के तौर पर केवल बाढ़ से बर्बाद हुए घरों के मालिकों को ही मुआवजा बांट सका है। वर्ष 2015 में गर्मियों में अतिवृष्टि के चलते किसानों की खेत में खड़ी गेहूं की फसल लेट गई थी। ऊसकी क्षतिपूर्ति दिलाया जरूर लेकिन किसान इससे संतुष्ट नहीं हैं। किसी को पांच हजार तो किसी को तीन हजार रुपये ही मुआवजे के तौर पर मिल सके। अबकी किसान अच्छी क्षतिपूर्ति की आस लगाये हुए हैं।