लघुडाल पंप कैनाल से निकली झाड़ियों से पटी खजुरी माइनर।-संवाद।
- फोटो : सारस तिराहे के पास राहुल गांधी का स्वागत करते लोग।
मिर्जापुर। सिटी ब्लाक क्षेत्र में सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग (उत्तर प्रदेश) ककराही पंप नहर के पुनरोद्धार के नाम पर वर्ष 2024-25 में 50 लाख रुपये से अधिक का धन खर्च हो गया लेकिन टेल पर बसे किसान सिंचाई के लिए पानी को तरह रहे हैं। खेत के बगल से गुजरी माइनर झाड़ियों से पटी है। पानी के अभाव में किसान मजबूरी में 50 रुपये घंटा मोल के पानी से फसलों की सिंचाई करने के लिए विवश हैं।
सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग (उत्तर प्रदेश) ककराही पंप नहर की स्थापना 1973 में हुई है। पांच क्यूसेक क्षमता वाले डेढ़ किलोमीटर लंबाई वाले मुख्य नहर से कुल 211 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई होती है। ककहराही, हरिहरपुर बेदौली, खजुरी को मिलाकर लगभग 500 तक छोटे-बड़े किसानों को फायदा होता है। ककराही पंप के मुख्य नहर से 800 मीटर लंबी खजुरी राइट नहर व 600 मीटर खजुरी लेफ्ट माइन निकली है। लेफ्ट और राइट माइनरों की हालत यह कि जगह-जगह झाड़ियों से पटी है। इस पर विभाग को कोई ध्यान नहीं है। कई स्थानों पर अतिक्रमण से नहर का नामोनिशान तक मिट गया है। मुख्य नहर की दशा भी कुछ ठीक नहींं है। देखरेख और मरम्मत के अभाव सीपेज से पानी बहता है। इससे फसलें डूबकर बर्वाद हो जाती हैं।