दीवानपुर स्थित सिद्धेश्वर महादेव मंदिर परिसर में चल रही रामकथा के चौथे दिन बृहस्पतिवार को धरम जी महाराज ने सीता-राम विवाह और एकादशी महात्म्य का प्रसंग सुनाया। उन्होंने कहा कि सीता-राम विवाह भारतीय संस्कृति में आदर्श दांपत्य, मर्यादा और पारिवारिक मूल्यों का प्रतीक है। वहीं, एकादशी व्रत आत्मसंयम, भक्ति और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करता है।
कथावाचक ने कहा कि भगवान शिव के धनुष को भंग करने के बाद राजा जनक ने माता सीता का विवाह श्रीराम के साथ कराया। जनकपुर में विवाह वैदिक मंत्रोच्चार, मंगलगीत और उत्सव के बीच हुआ। यह विवाह धर्म और मर्यादा के दो महान आदर्शों का संगम था। उन्होंने एकादशी व्रत की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि भगवान विष्णु को समर्पित यह व्रत मन और इंद्रियों के संयम का पर्व है। एकादशी व्रत रखने वाले में सकारात्मक विचारों का विकास होता है और भक्ति भाव मजबूत होता है। इस दौरान भाजपा के पूर्व मंडल अध्यक्ष संतोष दुबे, रंगीलाल, रमाकांत, रामचंद्र पटेल, विश्वास पटेल, अनामिका, साधना आदि मौजूद थीं।