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दे चंदा आशीष, अखंड रहे सुहाग

Thu, 20 Oct 2016 12:40 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला/ मिर्जापुर
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चांद का दीदार
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कार्तिक मास की कृष्ण चतुर्थीको सुहाग की सलामती के लिए  सुहागिन महिलाओं ने करवाचौथ का व्रत रखा। सुबह संकल्प लेकर व्रत आरंभ किया। विधान पूर्वक पूजन-अर्चन करके पूरे दिन  व्रत रख कर व्रत  के कथा का भी श्रवण किया। शाम को चलनी से चांद का दीदार कर पूजन बाद पति  द्वारा अन्न-जल ग्रहण कर पारण किया। 
व्रती  महिलाएं दिन भर निराजल रहीं। हाथों में  मेंहदी रचाई, शृंगार किया और पूजे की थाल सजाकर चांद के उगने की प्रतीक्षा करने लगीं।  शिव-पार्वती, कार्तिकेय, गणेश  जी तथा चंद्रमा का विधिवत पूजन-अर्चन कर मंगलकामना की। शाम को चंद्रोदय के  बाद व्रती महिलाओं ने चंद्रमा को अर्घ्य देकर विधिवत पूजन-अर्चन किया।
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 सुहागिन महिलाओं ने चंद्रमा पूजन के बाद मिट्टी के करवे में चावल, उड़द की  दाल व सुहाग सामग्री रखकर अपनी सास या अपने सास के समकक्ष किसी सुहागिन के  पांव छूकर व्रती महिलाओं ने सुहाग सामग्री भेंट की। सांयकाल चंद्रमा का  दर्शन करने के बाद अपने पति द्वारा अन्न व जल ग्रहण कर घर में  बड़े-बुजुर्गों का आाशीर्वाद प्राप्त कर व्रती महिलाओं ने घरों में  बड़े-बुजुर्गों से आशीर्वाद प्राप्त कर व्रत तोड़ा।
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छांदोग्य उपनिषद के  अनुसार चंद्रमा में पुरुष रूपी ब्रम्हा की उपासना करने  से सारे पाप नष्ट हो जाते हैं। इससे जीवन में किसी भी प्रकार का कष्ट नहीं  होता है। 
 
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