मिर्जापुर। क्षेत्र के अधिकांश नहरें और माइनरों में इन दिनों पानी के बजाय धूल उड़ रही है। गेहूं की फसल की अंतिम सिंचाई के लिए पानी नहीं मिल रहा। हाल यह है कि कहीं-कहीं तो आसपास के बच्चे नहरों में क्रिकेट खेलते हैं। जबकि विभाग दम भर रहा कि क्षेत्र की नहरों में पानी छोड़ा जा रहा।
पटेहरा कला, क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय के सामने स्थित पानी विहीन धनरौल बांध से निकली नहर में बच्चे वॉलीबाल खेलते हैं। जबकि इस नहर से पहाड़ी इलाके के पटेहरा, मलुआं, अमोई, पड़रिया, पथरौर, ककरद समेत लगभग 3 दर्जन से अधिक गांव जुड़े हैं। मलुआ गांव निवासी किसान बबलू गुप्ता का कहना है कि अंतिम सिंचाई के बिना फसल सूख रही है। हलिया, सुखरा तथा अदवा बांध से निकली 30 किलोमीटर लंबी नहर से प्रयागराज के छह से ज्यादा गांवों में सिंचाई होती है। लेकिन अधिकांश स्थानों पर नहर टूटी हुई है। जिससे पानी खेतों के बजाय इधर-उधर नालों में बह जा रहा। जीर्णशीर्ण नहरों के चलते महेशपुर, दुर्जनीपुर, नदौली व पटेहरा गांव में टेल तक पानी नहीं पहुंच रहा। विजय नारायण मिश्र, हर्ष नारायण मिश्र, लल्लन तिवारी आदि का कहना है कि नहरों की सफाई व मरम्मत आदि के नाम पर प्रतिवर्ष लाखों रुपये खर्च तो जरूर होते हैं लेकिन काम समुचित ढंग से न होने के कारण टेल तक पानी नहीं पहुंच रहा । जमालपुर,क्षेत्र के नहरो की दशा ख़राब होने से टेल तक पानी नहीं पहुंच पा रहा। सफाई के नाम सरकार का लाखों रुपये खर्च तो हो गया लेकिन नहरों में पानी नहीं आ रहा। सिकंदरपुर माईनर, जोगवा, बुधवार माईनर, रामपुर, बेलहर राजबाहा की हालत बेहद खराब है। बहुआर निवासी ओमप्रकाश सिंह का कहना है कि नहरों का पानी टेल नहीं पहुंच रहा। अधिकारी भी ध्यान नहीं दे रहे। बहुआर, सेमरा, तेतरिया कला, जमालपुर, हनुमानपुर व मदरा गांव में टेल तक पानी नहीं पहुंच रहा है।
शेरवां, क्षेत्र में भी नहरों की दशा काफी खराब है। टेल तक पानी नहीं पहुंच रहा। इससे रबी की फसल की दूसरी सिंचाई नहीं हो पा रही। हुसैनपुर बियार के पास से शेरवां, भोकरौध, गौरी, चतुरीपुर, माइनर से शेरवां क्षेत्र के पहाड़ी इलाके की सिंचाई होती हैं। लेकिन इस समय में नहरों में पानी नहीं है। जाफरखानी गांव निवासी किसान जनमेजय द्विवेदी का कहना है कि नहरों में पानी पिछले पखवाड़े में छोड़ा गया था। लेकिन नहरों का पानी टेल पर बसे किसानों को समय से नहीं मिल पाया है।