मिर्जापुर। मझवां विधानसभा उपचुनाव में 20 नवंबर को मतदान होना है। इस बीच उपचुनाव में भाग्य आजमा रहे सभी 13 प्रत्याशियों ने सोमवार को शाम प्रचार बंद कर घर-घर संपर्क तेज कर दिया।
उधर, प्रचार थमते ही विधानसभा क्षेत्र के हर दरवाजे पर दस्तक देने के लिए राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता और प्रत्याशी तथा उनके समर्थक जुट गए हैं। किस प्रत्याशी ने मतदाताओं को प्रभावित किया, इसका पता 23 नवंबर को मतगणना के दिन ही चल सकेगा। इस बीच सोमवार की शाम पांच बजे चुनाव प्रचार थम गया। 20 नवंबर को सुबह सात बजे से मतदान शुरू होगा। चुनाव प्रचार थमने के साथ ही दूसरे जिलों में रहने वाले मंत्री, विधायक और सांसद आदि अपने-अपने घरों को लौट गए हैं। अब प्रचार की जिम्मेदारी प्रत्याशी और पार्टी के स्थानीय नेताओं व कार्यकर्ताओं पर आ गई है। मझवां विधानसभा उपचुनाव मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सरकार के लिए नाक की लड़ाई बन गई है, वहीं सपा के लिए मझवां में पहली जीत दर्ज करने का मौका है। बसपा पुराने इतिहास को फिर दोहराने के लिए संघर्ष कर रही है। राजनीतिक दल मझवां विधानसभा क्षेत्र में पूर्व में हुए चुनावों के पुराने आंकड़ों को देखते हुए जाति विशेष को अपने पाले में करने के लिए हरसंभव कोशिश कर रहे हैं।
भाजपा की शुचिस्मिता मौर्य पार्टी के टिकट पर दोबारा जीत दर्ज करने के लिए चुनाव मैदान में हैं। लोकसभा चुनाव में के दौरान प्राप्त खट्टे-मीठे अनुभवों और उपचुनाव में जीत के दबाव के साथ ही भाजपा चुनाव मैदान में पूरी ताकत से जुटी है। चुनाव को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तीन बार जनसभा कर चुके हैं। चुनाव की घोषणा के बाद दो जनसभाएं तो पांच दिन के अंदर उन्होंने की। इसी प्रकार केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल, सांसद विनोद बिंद, उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक दो बार चार कार्यक्रमों में शामिल हो चुके हैं। उपमुख्यमंत्री केशव मौर्य तीन बार, कैबिनेट मंत्री आशीष पटेल और अनिल राजभर तीन महीने से चुनाव प्रचार में लगे हैं। रामकेश निषाद, संजीव गौड़, संगीता बलवंत, हंसराज विश्वकर्मा, विनोद सोनकर, धर्मेंद्र राॅय, प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी आदि के भी कार्यक्रम हुए हैं। उधर, सपा गठबंधन एक नए चेहरे पर पुराने भरोसे के साथ उपचुनाव में मैदान में है। ज्योति बिंद के पिता रमेश बिंद तीन बार विधायक रह चुके हैं। सपा के कोर वोट यादव, अल्पसंख्यकों की संख्या मझवां विधानसभा क्षेत्र में बहुत ज्यादा नहीं है। ऐसे में पार्टी ने किंग मेकर की भूमिका में रहने वाले ब्राह्मण और बिंद में से एक बिंद मतदाताओं को साधने के लिए रमेश बिंद की पुत्री पर भरोसा जताया है। हालांकि भाजपा के डॉ. विनोद बिंद भी बिंद मतदाताओं के बडे धड़े के नेता बनकर उभरे हैं। बिंद मतदाताओं के बंटने की किसी प्रकार की संभावना को देखते हुए सपा-बसपा के कैडर वोटरों को भी अपनी ओर खींचने में जुटी है। बिंद और बसपा के मतदाताओं का साथ मिला तो सपा अपनी पहली जीत का स्वाद चख सकती है। हालांकि उपचुनाव में विधानसभा क्षेत्र में सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने एक जनसभा की है। प्रदेश अध्यक्ष श्याम लाल पाल दो, जौनपुर सांसद बाबू सिंह कुशवाहा ने एक बार, नेता विपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने एक चौपाल, अंबिका चौधरी ने तीन दिन से जनसंपर्क किया है। चुनाव प्रभारी चंदौली के सपा सांसद वीरेंद्र सिंह, पूर्व सांसद बाल कुमार पटेल, सकलडीहा विधायक प्रभु नारायण यादव शुरू से ही यहां डटे हुए हैं। मछलीशहर सांसद प्रिया सरोज, मछलीशहर विधायक रागिनी सोनकर ने भी एक-एक बार चौपाल लगाई है। उधर, मझवां विधानसभा उपचुनाव को ध्यान में रखते हुए सबसे पहले बसपा ने अपना प्रत्याशी मैदान में उतारने की घोषणा की। बसपा ने कैडर वोटरों के साथ ही ब्राह्मण बहुलता वाले क्षेत्र को ध्यान में रखते हुए दीपक तिवारी को टिकट दिया है। प्रत्याशी ने भी टिकट पाते ही एससी-एसटी और ब्राह्मण मतदाताओं के बीच प्रचार शुरू कर दिया। बसपा के बाद सपा और फिर भाजपा ने अपने प्रत्याशी मैदान में उतारे। दोनों पार्टियों ने प्रत्याशियों के लिए पूरी ताकत भी झोंक दी है। क्षेत्र में मुकाबला कांटे का होते देख अब जीत सुनिश्चित करने के लिए बसपा के वोटरों में भाजपा व सपा सेंधमारी की कोशिश कर रहे हैं। उधर, बसपा अपने वोटरों को जोड़ने और जीत का विश्वास पैदा कर उन्हें एकजुट रखने में लगी है। प्रचार करने वालों में अब तक मुख्य मंडल जोन इंचार्ज लखनऊ रंगनाथ रावत की ओर से मझवां में जन संपर्क किया गया है।। इसी तरह बसपा के प्रदेश अध्यक्ष विश्वनाथ पाल की ओर से पहाड़ी ब्लाॅक के नकटी मिश्रौली में आठ नवंबर को जनसभा की गई थी। आचार संहिता प्रभावी होने के बाद से ही बसपा नेता पूर्व राज्यमंत्री अशोक कुमार गौतम प्रतिदिन मझवां विधानसभा क्षेत्र में जनसंपर्क कर रहे हैं।