मिर्जापुर जिला मुख्यालय पर बुधवार को 15 वर्षों बाद कागजों में जिंदा होने वाले भोला सिंह एक बार फिर से धरने पर बैठ गए। उन्होंने आरोप लगाया कि खतौनी तो मिल गई लेकिन भाई उनको उनका हिस्सा नहीं दे रहा है। अमर उजाला की पहल पर 15 वर्षों से कागजों में मृत भोला सिंह को अंततः न्याय तो मिला।
जांच के बाद उनका नाम खतौनी में दर्ज किया गया और सोमवार को तहसीलदार ने उनको नाम की खतौनी भी दे दी, लेकिन अब भोला सिंह का आरोप है कि उनका भाई उनको जमीन में हिस्सा नहीं दे रहा है। भोला सिंह ने 16 जनवरी 2021 को जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन कर आरोप लगाया था कि उनके भाई ने साजिश कर कागजों में उनको मृत दिखाकर उनका हिस्सा हड़प लिया।
इसको अमर उजाला ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था। इसके बाद सीएम योगी ने भी इसका संज्ञान लिया और कार्रवाई के लिए प्रशासन को निर्देश दिया। इसके बाद डीएनए जांच व अन्य कागजी कार्रवाई शुरू हो गई।
सीएम की दखलंदाजी के बाद जिला प्रशासन सक्रिय हो गया। जब भोला का भाई डीएनए जांच से कतराने लगा तो प्रशासन ने कार्रवाई की और वाद दाखिल कर भोला का नाम खतौनी में चढ़ाकर खतौनी उनको सौंपी। लेकिन हिस्से को लेकर भोला सिंह एक बार फिर से चर्चा में हैं।