राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत राशनकार्डों को बनाने में भारी गड़बड़ी की जा रही है। नगर पालिका क्षेत्र में कुछ सभासदों तथा ग्रामीण क्षेत्रों में कुछ प्रधानों और सेक्रेटरी द्वारा पात्र लाभार्थियों के चयन में अनियमितता बरती जा रही है। जिसके कारण पात्रों का सही चयन नहीं हो पा रहा है।
वहीं अपात्रों का चयन होने से लोगाें में रोष व्याप्त है। वहीं आर्थिक रूप से संपन्न, प्रभावशाली लोगों का नाम भी सूची में धड़ल्ले से दर्ज कर लिया जा रहा है। इन लोगों द्वारा भी नाम दर्ज कराने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। इससे सूची का सत्यापन करने जा रहे पूर्ति निरीक्षकों को चयन सूची से वंचित लोगों के आक्रोश का सामना करना पड़ रहा है, 22 मार्च को अपात्रों का चयन होने से नाराज ग्रामीणों ने पड़री ब्लाक मुख्यालय पर प्रदर्शन किया। ग्रामीणों को शांत करने के लिए एसडीएम सहित तीन थानों की फोर्स को पहुंचना पड़ा।
नगरीय और ग्रामीण क्षेत्रों में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 (एनएफएसए) एक मार्च 2016 से लागू हो गया है। एनएफएसए में चार लाख 14 हजार 90 कार्डधारक हैं। जिसमें 69 हजार 665 अंत्योदय और तीन लाख 44 हजार 425 पात्र गृहस्थ हैं, जबकि नगर पालिका क्षेत्र में 1484 अंत्योदय कार्डधारक और 42 हजार 679 सहित 44 हजार 163 लाभार्थी हैं।
जिले के लगभग 17 लाख व्यक्तियों को एनएफएसए योजना के तहत प्रति कार्ड पांच किग्रा अनाज वितरण की कवायद की जा रही है। एनएफएसए लागू होने के पहले जिले में पांच लाख 35 हजार 515 कार्डधारक थे, जिनमें से तीन लाख 62 हजार 867 एपीएल कार्डधारक, 69 हजार 650 अंत्योदय कार्डधारक और एक लाख दो हजार 783 बीपीएल व शेष कार्डधारक थे।