अक्षय-तृतीया मंगलवार को मनाई जाएगी। रोहिणी नक्षत्र और शोभन योग की अक्षय तृतीया सर्वोत्तम मानी गई है। पौराणिक ग्रंथों के अनुसार इस दिन जो भी शुभ कार्य किए जाते हैं, उनका अक्षय फल प्राप्त होता है। इसी कारण इसे अक्षय तृतीया कहा जाता है।
अध्यात्मिक धर्म गुरु त्रियोगी नारायण मिश्र ने कहा कि वैशाख शुक्लपक्ष तृतीया को स्वयंसिद्ध मुहूर्त या अक्षय तृतीया के रूप में मनाया जाता है। अक्षय तृतीया के दिन शुभ कार्य शुरू करने का विशेष महत्व होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार किसी भी शुभ कार्य को करने के लिए अक्षय तृतीया के दिन पंचांग तक देखने की कोई आवश्यकता नहीं होती है। माना जाता है कि इस दिन गृहस्थ लोगों को अपने धन वैभव में अक्षय बढ़ोतरी करने के लिए अपनी कमाई का कुछ हिस्सा धार्मिक कार्यों के लिए दान करना चाहिए। ऐसा करने से उनके धन और संपत्ति में कई गुना बढ़ोत्तरी होती है। आध्यात्मिक धर्म गुरु ने बताया कि इस दिन भगवान विष्णु व लक्ष्मी की पूजा करने से धन संपदा में अक्षय वृद्धि होती है। अक्षय तृतीया के दिन हरिहर अर्थात भगवान विष्णु एवं शिव की संयुक्त पूजा करना भी फलप्रद है। इसका विधान यह है कि सर्वदेव स्वरूप श्री शालिग्राम जी का रुद्राष्टध्यायी के द्वितीय एवं पंचम अध्याय का पाठ करते हुए पंचामृत से अभिषेक करें। ऐसे आराधक इस लोक में सुख प्राप्त कर हरिहर अर्थात विष्णु-शिव लोक प्राप्त करते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार मिथुन, कन्या, धनु और मीन राशि के जातकों के लिए गुरु स्वराशि में होने से हंस योग का निर्माण कर रहे हैं तो शुक्र भी अपनी उच्च राशि में स्थित होकर मालव्य योग का निर्माण कर रहे हैं। वैसे तो यह गोचर सभी राशियों के लिए उत्तम रहने वाला है। अक्षय तृतीया के दिन स्वर्ण खरीदने का विशेष महत्व होता है। जहां तक आज दान देने का सवाल है तो अक्षय तृतीया के दिन पंखा, चावल, नमक, घी, चीनी, सब्जी, फल, और वस्त्र वगैरह का दान कर भक्त अक्षय पुण्य के भागी बनते हैं ।