अशिक्षा, गरीबी, मुफलिसी और संसाधनों के अभाव में रामपुर ढबही के छोटी खोरिया में अबूझ बीमारी ने दस्तक दे दी है। बीते पांच दिनों में तीन बच्चों ने दम तोड़ दिया। मुंह नाक से झाग निकल के लक्षण से जो भी बच्चा ग्रसित हो रहा है उसकी मौत हो जा रही। दो माह के भीतर एक ही परिवार में चार मौतें हो चुकी हैं। मंगलवार की देर रात साढ़े 12 बजे चार वर्षीय आंचल ने भी मंडलीय अस्पताल में दम तोड़ दिया। दो अन्य बच्चे भी जिंदगी की जंग से लड़ रहे हैं। लगातार हो रही अबूझ मौतों के चलते छोटी खोरिया का यह कुनबा सदमे हैं। उधर, अमर उजाला में बुधवार को प्रकाशित खबर के बाद प्रशासनिक अधिकारी गांव पहुंचे और बच्चों की जांच की।
दो माह पूर्व मौत के गाल में समाए अंशु (5) का जिक्र करते हुए उसकी मां बिंदु पत्नी मंगरू ने बताया कि मुंह से झाग आने के बाद सांस अचानक तेज हो गई। इसके बाद उसकी मौत हो गई। रविवार को इसी तरह के लक्षण के चलते दूसरे पुत्र अंश (7) की भी मौत हुई है। इसी तरह से गांव की सोनी ने बताया कि शनिवार को ऐसे ही लक्षण उसकी पुत्री काजल (8) में भी देखे दिए। समय से उपचार नहीं मिल पाया और उसकी मौत हो गई। तीन बच्चों की मौत के बाद परिवार सदमे में था कि तीन अन्य बच्चे भी इस बीमारी की चपेट में आ गए। सभी को उपचार के लिए बुधवार की रात मंडलीय अस्पताल लाया गया। जहां इलाज के दौरान आंचल (5) पुत्री कल्लू की मौत हो गई। मंगरु का पुत्र अनु (4) व कल्लू का पुत्र राजा (4) भी इस गंभीर बीमारी के शिकार हैं। अमर उजाला में बुधवार को बच्चों की मौत की खबर को प्रकाशित किए जाने के बाद उपजिलाधिकारी चुनार नीरज पटेल पीड़ित परिवार के घर पहुंचे। एंबुलेंस मंगाकर बीमार बच्चों को मंडलीय अस्पताल भेजने की व्यवस्था कराई। मौके पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र राजगढ़ के अधीक्षक डीके सिंह भी पहुंचे। जिन्होंने मुंह से झाग आने के लक्षण से ग्रसित दोनों नौनिहालों अन्नु व राजा की बेहतर चिकित्सा के लिए चिकित्सकीय जांच कराने का आश्वासन दिया है।
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जिन बच्चों की मौत हुई है, सभी के लक्षण एक जैसे ही प्रकाश में आ रहे हैं। अचानक से चक्कर आना, मुंह से झाग निकलना इसके बाद गिर जाना, यह मिर्गी के लक्षण प्रतीत हो रहे हैं। सही समय पर इलाज ने होने पर पानी फेफड़े में चला जाता है। चोक हो जाने के बाद अचानक मौत संभव है। सीटी स्कैन व अन्य परीक्षण के बाद ही वास्तविक बीमारी का पता चल पाएगा।
डॉ. डीके सिंह, अधीक्षक सीएचसी राजगढ़
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बच्चों के माता-पिता से बात की गई है। एक ही परिवार के दो बच्चों में इस लक्षण से मौत हो गई। एक सप्ताह के भीतर तीन बच्चों की मौत हो गई। उक्त परिवार के ही दो और बच्चे बीमार बताए जा रहे हैं। हालांकि महामारी जैसे कोई लक्षण नहीं है। जो भी जांच होगी, उसी के अनुसार आगे का इलाज चलेगा। जांच और इलाज का पूरा इंतजाम किया जाएगा। - नीरज पटेल, उप जिलाधिकारी चुनार
नजदीकी अस्पताल में होता इलाज तो बच जाती जान : बिंदु
अहरौरा। तबीयत बिगड़ने के बाद अंश व अंशु को नजदीकी अस्पतालों में इलाज मिल गया होता तो उनकी जान बच गई होती। इलाज के अभाव में इस कुनबे के एक ही परिवार से चार चिराग बुझ गए। अगर नजदीकी अस्पताल में पर्याप्त इलाज की व्यवस्था होती और समय से इलाज हो जाता तो मासूमों की जान बच जाती।
दूषित पेयजल और गंदगी हर तरपु
अहरौरा। स्माइल पिंकी वाली पिंकी के इस कुनबे में पेयजल का एकमात्र साधन हैंडपंप ही है। इससे चारों तरफ प्रदूषण और गंदगी चरम पर है। इलाके के लोग दूषित पेयजल से ही अपनी प्यास बुझा पाते हैं। आबादी क्षेत्र के चारों तरफ गंदगी का आलम बना हुआ है। विकास और विकसित संसाधनों के अभाव में इस क्षेत्र के लोगों को मजदूरी करके ही अपनी आजीविका चलानी पड़ती है परंतु इसकी सुधि लेने वाला कोई नहीं।
आंचल अस्पताल में आई थी तो उसे बुखार था। जांच करने पर चेस्ट इंफेेक्शन, दिमागी बुखार व झटका का लक्षण था। इससे लग रहा है कि अन्य बच्चों को भी बुखार आया। परिजन समय से उपचार नहीं कराए। झाड़-फूंक मेें लगे रहे। इस कारण बच्चों की हालत बिगड़ रही। डॉ. देवराज यादव, बाल रोग विशेषज्ञ, मंडलीय अस्पताल
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