मिर्जापुर। राष्ट्रीय समालोचक स्व. डा. भवदेव पांडेय की 89 वीं जयंती पर नगर के तिवराने टोला स्थित उनके आवास पर मनाई गई। इस अवसर पर जुटे विद्वानों ने उन्हें अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान विद्वान वक्ताओं ने डा. पांडेय के साथ जुड़े आत्मीय प्रसंगों का उल्लेख किया।
साहित्यकार बृजदेव पांडेय ने कहा कि डा. पांडेय अपनी रचनाओं में समकालीन बुराइयो से लड़ने, संघर्ष करने की प्रेरणा देते थे। उन्हाेंने मिथक, योग, इतिहास समाज में सन्निहित प्रच्छन्त चेतना को सामाजिक उपादेयता के कसौटी पर कसा, उन्हें नया रूप दिया। मुख्य अतिथि एमएलसी श्याम नारायण सिंह ने कहा कि डा. पांडेय जैसे मनस्वी साधक के जन्मदिवस पर उपस्थित होकर मैं अपने आप को भाग्यशाली मानता हूं। अध्यक्षता करते हुए पूर्व सांसद पंडित उमाकांत मिश्र ने कहा कि डा. पांडेय जैसा मूर्धन्य विद्वान एक ही बार पैदा पैदा होता है। कवि लल्लू तिवारी ने भोजपुरी कविता के माध्यम से डा. पांडेय को नमन किया। अधिवक्ता नारायण जी उपाध्याय ने अपनी कविता में श्रद्धांजलि दी। डा. गणेश प्रसाद अवस्थी ने कहा कि डा. भवदेव पांडेय ने होम्योपैथी एवं आयुर्वेद जैसे विषयों पर आयोजित कार्यक्रमों में शास्त्रों से सूत्र लेकर जो मौलिक उद्भावनाएं व्यक्त की थी, वह उनके ज्ञान की पूर्णता द्योतक थी। सत्य नारायण तिवारी ने कहा कि डा. पांडेय द्वारा 70 के दशक में शिक्षक आंदोलन में निभाई गई भूमिका पर प्रकाश डाला। डा. केडी सिंह ने कहा कि डा. पांडेय का व्यक्तित्व विराट था। कृष्णकांत त्रिपाठी ने कहा कि डा. पांडेय ने अपने लेखन ने नया प्रतिमान गढ़ा था। कवि लल्लू तिवारी ने भोजपुरी कविता के माध्यम से अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम के दौरान प्रभु नारायण श्रीवास्तव, शंभूनाथ अग्रवाल, जयराम शर्मा, राजकुमार सिंह आदि ने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का संचालन अरविंद अवस्थी ने किया। कार्यक्रम में आए अतिथियों का स्वागत सलिल पांडेय ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन यथार्थ पांडेय ने किया।