विंध्याचल। विंध्य त्रिकोण क्षेत्र के शिवपुर में स्थित रामेश्वर महादेव श्रद्धालुओं की आस्था और विश्वास के केेंद्र हैं। मान्यता है कि प्रभु श्रीराम ने रावण वध करने के बाद विंध्याचल आकर रामगया घाट पर अपने पितरों को पिंडदान किया था। इसके बाद उन्होंने शिवलिंग की स्थापना भी थी जो रामेश्वरम महादेव नाम से प्रसिद्ध हैं।
मान्यता है कि रामेश्वरम महादेव का सच्चे मन से दर्शन पूजन से श्रद्धालुओं की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। तीर्थ पुरोहित पं. त्रियुगी नारायण मिश्र ने प्रचलित कथा का जिक्र करते हुए बताया कि भगवान श्री राम ने रावण का वध करने के बाद अयोध्या पहुंचे तो ब्रह्म हत्या और पिता को सद्गति न होने की चिंता सताने लगी। उन्होंने जब गुरु वशिष्ठ को चिंता बताई तो उन्होंने पिता के मोक्ष के लिए बिहार के गया में श्राद्ध करने का सुझाव दिया। प्रभु श्री राम सपरिवार आकाश मार्ग से चल पड़े। विंध्याचल धाम में उनका विमान अचानक ठहर गया। यह रहस्य उन्होंने गुरु वशिष्ठ से जानना चाहा। गुरु वशिष्ठ ने बताया कि यह मां विंध्यवासिनी का दरबार है। यहां कर्णावती गंगा का संगम है जहां स्नान करने से ब्रह्म हत्या जेसे महापाप से मुक्ति मिलती है। इसके बाद श्रीराम ने यहां पिंडदान किया। उस स्थान को रामगया नाम से जाना जाता है। श्रीराम ने यहीं शिवलिंग की स्थापना की जिन्हें रामेश्वर महादेव के नाम से जाना जाता है।