मिर्जापुर। पुत्री के साथ मिलकर सिपाही को फंसाने के मामले में जिला जेल में निरुद्ध महिला बंदी की जमानत अर्जी को अपर सत्र न्यायाधीश विशेष शर्मा की अदालत ने शनिवार को नामंजूर कर दिया। अदालत ने कहा कि अपराध की गंभीरता को देखते हुए जमानत का उचित आधार नहीं है।
शहर कोतवाली क्षेत्र की रहने वाली महिला ने शहर कोतवाली में तहरीर देकर प्राथमिकी दर्ज कराई कि हेड कांस्टेबल शेषमुनि राम उसकी नाबालिग पुत्री को बहला फुसलाकर मेला दिखाने के बहाने भगा ले गए और उसके साथ दुष्कर्म किया। पुलिस ने आरोपी सिपाही के खिलाफ केस दर्ज कर महिला की पुत्री को बरामद कर 27 अक्तूबर 2017 को द्वितीय मजिस्ट्रेट के कोर्ट में बयान कराया। बयान में पुत्री ने सिपाही से पांच लाख रुपये वसूलने के चक्कर में मां के साथ मिलकर साजिश रचने का खुलासा किया। इसके बाद शहर कोतवाली पुलिस ने महिला के खिलाफ केस दर्ज कर जांच की और महिला को गिरफ्तार लिया था। जेल में निरुद्ध महिला ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से जिला जज के यहां अपनी जमानत अर्जी दी। कोर्ट ने अधिवक्ताओं का पक्ष सुनने के बाद महिला की जमानत अर्जी को खारिज कर दिया। जमानत का विरोध शासकीय अधिवक्ता फौजदारी रमेंद्र कुमार शुक्ल ने किया।