मिर्जापुर। पूर्वांचल में फिर से कांग्रेस में जान फूंकने की कोशिशों में जुटी पार्टी की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी से जिले के कांग्रेसियों को करिश्मे की उम्मीद है। जिले में बीते 35 सालों से कांग्रेस का कोई सांसद नहीं चुना गया। सन 1984 में उमाकांत मिश्रा यहां से पार्टी के अंतिम सांसद थे। कभी एक समय था कि जब मिर्जापुर कांग्रेस का गढ़ कहा जाता था। अजिज इमामा जैसे नेता यहां से चुने जाते थे। पं. लोकपति त्रिपाठी मझवां और मड़िहान से विधायक रहे हैं। जीत का सूखा खत्म करने के लिए पार्टी को प्रियंका नाम की संजीवनी का सहारा है। 1957 में मिर्जापुर संसदीय सीट से कांग्रेस के रूप नारायण चुनाव जीते थे। इसी साल यहां से फिर जेएन विल्सन चुनाव जीते। 1962 में यहां से श्याम बहादुर मिश्रा ने जीत दर्ज की। 1971 औरर 1980 में अजिज इमाम ने जीत दर्ज की। 1980 के उपचुनाव और 1984 में कांग्रेस के ही उमाकांत मिश्रा यहां से सांसद चुने गए। 1984 के बाद से यहां से कांग्रेस का कोई भी नेता सांसद नहीं चुना जा सका। 2014 के लोकसभा चुनाव में ललितेशपति त्रिपाठी ने दमदारी के साथ चुनाव लड़ा लेकिन वह जमानत नहीं बचा पाए। उन्हें 152666 वोट मिले थे। कांग्रेेस के पुराने नेता बताते हैं कि अजिज इमाम के लिए प. जवाहरलाल नेहरू प्रचार करने आते थे। उनके प्रचार में इंदिरा गांधी भी अक्सर मिर्जापुर आती थी। पं लोकपति त्रिपाठी के प्रचार में भी पार्टी के आला नेता प्रचार के लिए आते थे।
मंदिर से रहा है पुराना नाता
प्रियंका गांधी मंगलवार को पहली बार विंध्य धाम पहुंची थी। उन्होंने चुनरी चढ़ाने के बाद आशीर्वाद मांगा। विंध्यवासिनी मंदिर में पिछले साल राहुल गांधी आए थे। सोनियां गांधी 2003 में रोड शो के दौरान मंदिर में दर्शन करने आई थी। इंदिरा गांधी चार बार मंदिर में दर्शन करने आई थी। मोती लाल नेहरू भी मंदिर में दर्शन करने पहुंच चुके हैं।