मिर्जापुर। सत्र न्यायाधीश अशोक कुमार मिश्र ने गैर इरादतन हत्या के एक मामले में तीन आरोपियों की शुक्रवार को जमानत अर्जी को निरस्त कर दिया। जमानत का विरोध करते हुए शासकीय अधिवक्ता फौजदारी आशुतोष अग्रवाल ने यह तर्क दिया कि गवाह राकेश कुमार, अमरनाथ ने बयान में कहा है कि घटना के समय भाईलाल को मार कर फेंकते हुए देखा था।
अभियोजन के अनुसार शहर कोतवाली क्षेत्र के मल्लाही टोला निवासी एवं मृतक भाईलाल की पत्नी लक्ष्मी देवी ने कोतवाली में 28 दिसंबर 2017 को तहरीर देकर आरोप लगाया कि क्षेत्र के लक्कड़ उर्फ अजय पुत्र कन्हैयालाल, बुधिराम पुत्र पुटटुर तथा विशाल पुत्र अलगू निवासी मल्लाही टोला 13 दिसंबर 2017 को शाम आठ बजे घर आए। शराब पिलाने के बहाने भाईलाल को करार पर ले गए और वहां ईंट पत्थर से कूंच कर लगभग सौ फीट गहरे करार से गंगा में धक्का दे दिया था जिससे उसकी मौत हो गई थी। पुलिस ने तहरीर के आधार पर आरोपियों के विरुद्घ धारा 304 ,506 भादंसं के तहत मुकदमा दर्ज कर आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। आरोपियों ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से जिला जज की अदालत में जमानत की याचना की। जिस पर न्यायालय ने शुक्रवार को सुनवाई करते हुए दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं को दलीलों को सुना। न्यायालय ने कहा कि अपराध गंभीर प्रकृति का है। मेरी राय में जमानत का उचित आधार नहीं प्रतीत होता है इसलिए जमानत अर्जी खारिज की जाती है।