मिर्जापुर। लखनऊ में आयोजित हुए इंवेस्टर्स समिट में जिले के पुरातन बर्तन उद्योग को संजीवनी प्रदान करने के लिए कोई उद्योगपति आगे नही आया। सरकार के प्रतिनिधियों को भी इस उद्योग की बदहाली समिट में याद नही आई जिससे इसकी भलाई के लिए कोई बात नही हुई।
जिले के पीतल उद्योग कई पीढियों से कार्य कर उद्यमी नई तकनीकी अपनाने को तैयार नही हैं। सरकार भी इस कार्य में कोई योगदान नही दे रही है। बैंक ऋण देने में आनाकानी कर रहे हैं यही वजह है कि कभी पूरे देश में पीतल के बर्तनों के लिए ख्याति रखने वाला उद्योग पिछड़ता जा रहा है। जिले में इंडस्ट्रियल एरिया नहीं बल्कि इंडस्ट्रियल स्टेट है। समय के साथ पीतल के बर्तनों का व्यवसाय करने वाले लोगों की संख्या में गिरावट दर्ज की जा रही है। सरकार ने इस व्यवसाय को संरक्षण देने के लिए कोई योजना नहीं चलाई और न ही इस उद्योग में नयापन लाने के लिए किसी तकनीकी से ही उद्यमियों को परिचित कराया। उद्यमी भी नई तकनीकी की तरफ रुचि नहीं दिखा रहे हैं। जिले में इंडस्ट्रियल एरिया का निर्माण कर उसे प्रदूषण के मानकों के अनुसार ढाल कर इस उद्योग को बचाया जा सकता है। उद्योग को बढ़ावा देने के लिए सड़क,बिजली और अन्य संसाधनों की शिद्दत से जरूरत महसूस की जा रही है। फिलहाल शहर के घने इलाकों में संचालित हो रहे बर्तन उद्योग को बाहरी इलाकों में स्थानांतरित करने के कोर्ट के फैसले से उद्यमी सशंकित नजर आ रहे हैैं। इन समस्याओं पर समिट में बात नहीं उठाने पर पीतल के बर्तन कारोबारी निराश नजर आ रहे हैं।