मिर्जापुर। जिले में स्थित जल-प्रपातों पर सैलानियों के लिए कोई इंतजाम नहीं है, जिससे आसपास के जनपदों से आने वाले सैलानियों को असुविधा का सामना करना पड़ेगा। पर्यटन स्थलों तक पहुंचने के लिए न तो अच्छी सड़क है और न ही सैलानियों के बैठने के लिए पार्क आदि की व्यवस्था है। सुरक्षा-व्यवस्था तो दूर पर्यटन स्थलों पर पेयजल व प्रकाश व्यवस्था भी नदारद है।
जिले में स्थित अहरौरा क्षेत्र के लखनिया दरी एवं चूना दरी जल-प्रपात में विकास की असीम संभावनाएं हैं, लेकिन जनप्रतिनिधियों की अनदेखी व उपेक्षा के चलते विकास की गति मंद पड़ी हुई है। तीन तरफ पहाड़ियों से घिरा विहंगम जल-प्रपात वर्षों से उपेक्षा का शिकार बना हुआ है। जल-प्रपात से बारिश के मौसम में कल-कल करते झरने, मदमाती बयार व झूमती पेड़ों की डालियां तथा उनके बीच फुदकते वन्य जीव की मौजूदगी खुशनुमा मौसम का एहसास कराते हुए पर्यटन स्थलों पर चार चांद लगा देते हैं। लखनिया दरी व चूना दरी जल प्रपात पर एक बार जो भी सैलानी आ जाता है, वह यहां का कायल हो जाता है, लेकिन यहां सैलानियों के लिए किसी भी प्रकार की व्यवस्था नहीं है। पर्यटन स्थलों पर वाहनों के पार्किंग के नाम पर अवैध वसूली भी धड़ल्ले से किया जाता है। चुनार के सक्तेशगढ़ में सिद्धनाथ की दरी जल-प्रपात पर भी सैलानियों के लिए व्यवस्थाएं नाकाफी हैं। दूरदराज से यहां आने वाले सैलानियों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। नगर के करीब 15 किलोमीटर दूर विंढम फाल व खड़ंजा में बारिश के मौसम में रोजाना हजारों की संख्या में सैलानी पहुंचते हैं, लेकिन वहां किसी भी प्रकार की व्यवस्था नहीं है। साफ-सफाई के अभाव के साथ ही सैलानियों के बैठने तक के उचित इंतजाम नहीं हैं। पर्यटन स्थल पर वाहनों की पार्किंग के नाम पर सैलानी को परेशान किया जाता है, जिससे दूरदराज से आने वाले पर्यटकों को असुविधा होती है।